चाचा चौधरी का राका…..जीएसटी का अंगद…. साहब का…… दिन ऐश……

रायपुर : छत्तीसगढ़ के शासकीय कार्यालयों में भी अपने अलग अलग किस्से है । ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के जीएसटी विभाग का भी है। जीएसटी कार्यालय में अंगद की तरह पैर जमा बैठे एक अधिकारी के सामने किसी की भी नही चलती । वैसे तो यह एसटीओ की पोस्ट पर पदस्थ है,पर कहने वाले […]

रायपुर : छत्तीसगढ़ के शासकीय कार्यालयों में भी अपने अलग अलग किस्से है । ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के जीएसटी विभाग का भी है। जीएसटी कार्यालय में अंगद की तरह पैर जमा बैठे एक अधिकारी के सामने किसी की भी नही चलती । वैसे तो यह एसटीओ की पोस्ट पर पदस्थ है,पर कहने वाले इसे सुपर कमिश्नर के नाम से पुकारते है।जीएसटी कार्यालय में कोई भी ऐसा काम नही है जो यह महाशय नही करवा सकते।काम सब इनके इशारो में ही चुटकी बजाते ही हो जाता है।पर काम का एक पैमाना इनका तय है।ठीक ठाक व भारी भरकम लिफाफा लेना इनकी आदत में शुमार है।पूर्व में प्रवर्तन में पदस्थ रहते समय इनके द्वारा विभाग को फर्जी व झूठी रिपोर्ट बनाकर दी गयी थी जिससे शासन को करोड़ो के राजस्व का घाटा भी हुआ था।सरकार को चुना लगाने का काम इनके जैसे अधिकारी ही कर रहे है।प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर से एसटीओ बनने के बाद भी प्रवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विभाग में ही जमे रहे।प्रमोशन में तबादले होते है पर शासन के नियम इस खिलाड़ी के लिए शायद शिथिल कर दिए गए थे।

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सूत्र बताते है कि ये महाशय अपने आपको सुपर कमिश्नर से कम नही मानते है,अपनी काली कमाई से राजधानी के साथ ही अपने गृहजिले में भी बड़ी संपत्ति बनाई हुई है।रीडर साहब से कोई भी पंगा नही ले सकता क्योंकि इनके पास अफसरों को निपटाने के बहुत सारे यंत्र भी है।किसी भी अधिकारी की पुरानी फाइले खोलकर छोटी मोटी गलतियों को आसानी से पकड़ने में मास्टरी है।इस खेल के बाद अधिकारियों को डरा कर मोटी वसूली करता है।फिर जिस अधिकारी का काम इसके पास आता है वो अधिकारी इसके कहते ही काम कर देता है।अधिकारी भी इससे विवाद करने के मूड में नही रहते है।अब कौन सुपर कमिश्नर से पंगा लेगा।आज भी इसके इशारों में ही कमिश्नर चलते है।

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अपने विभाग के अंदर इंस्पेक्टर पर प्रमोट होने का खेल किया था। करोड़ो का खेल विभाग में रहे पुर्व कमिश्नर समीर बिश्नोई के साथ किया गया था।जिसका मास्टर माइंड इसे ही कहा जाता है।विभाग की गोपनीय जानकारी निकाल कर फर्जी नामो से शिकायत करवाकर अधिकारियों व कर्मचारियों को दबाने का काम भी करते आ रहा है।कुल मिलाकर इसके खेल से विभाग के उच्च अधिकारी भी इससे भय खाते है।वैसे अभी ये प्रवर्तन में तो नही है पर जिसके यहाँ भी छापा मरवाना हो तो लोग इसी महाशय से ही संपर्क करते है।कमिश्नर से कौन मिलेगा यह फैसला यही महाशय करते है क्योंकि साहब का सारा खर्चा यही उठाता है ऐसी चर्चा है।इन्ही सब कारणों से विभाग में इनको सुपर कमिश्नर की संज्ञा दी गयी है।कमिश्नर का दिन ऐश सब इसके ऊपर ही है।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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