सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आई केन्द्र की मोदी सरकार, पांच जजों की नियुक्ति को दी हरी झंडी

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आई केन्द्र की मोदी सरकार, पांच जजों की नियुक्ति को दी हरी झंडी नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी और फटकार के बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को पांच नए जजों की नियुक्ति को हरी झंडी दिखा दी। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट […]

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आई केन्द्र की मोदी सरकार, पांच जजों की नियुक्ति को दी हरी झंडी

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी और फटकार के बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को पांच नए जजों की नियुक्ति को हरी झंडी दिखा दी। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट करके यह जानकारी दी। ये सभी पांच जज विभिन्न हाई कोर्ट्स के हैं, जिन्हें अब प्रमोट करके सुप्रीम कोर्ट का न्यायधीश बनाया गया है। इससे पहले शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति में देरी किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर नाराजगी व्यक्त की थी।

सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए जाने वाले पांच जजों के नाम राजस्थान हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मिथल, पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल, मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीवी संजय कुमार, पटना हाई कोर्ट के जज अमानुल्लाह और इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज मनोज मिश्रा है।

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केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट किया, ”भारत के संविधान के तहत प्रावधानों के अनुसार, भारत के माननीय राष्ट्रपति ने हाई कोर्ट के निम्नलिखित मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के जजों के रूप में नियुक्त किया है। मैं उन सभी को शुभकामनाएं देता हूं।” अपने ट्वीट में पांच जजों के नामों की भी किरेन रिजिजू ने जानकारी दी है।

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केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि शीर्ष अदालत में पांच न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम द्वारा पिछले साल दिसंबर में की गई सिफारिश को जल्दी ही मंजूरी दी जाएगी। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति ए. एस. ओका की पीठ से कहा था कि इन पांच नामों की नियुक्ति का आदेश (वारंट) जारी हो सकता है।

वहीं, बेंच ने हाई कोर्ट के जजों के स्थानांतरण की सिफारिशों को मंजूरी देने में केंद्र द्वारा देरी किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा, ”यह काफी गंभीर मुद्दा है।” बेंच ने चेतावनी भी दी कि इसमें किसी भी देरी के परिणामस्वरूप प्रशासनिक और न्यायिक दोनों तरह की कार्रवाई हो सकती है, जो संभव है सुखद न हो।

SC ने दी थी चेतावनी, कहा- एक्शन लेने को न करें बाध्य
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने चेतावनी देते हुए कहा था कि हमें ऐसा कदम उठाने के लिए बाध्य नहीं करें, जो बहुत असहज करने वाला होगा। कॉलेजियम ने पिछले साल 13 दिसंबर को सर्वोच्च अदालत में पदोन्नति के लिए पांच न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की थी।

बाद में 31 जनवरी को प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नत करने के लिये केंद्र को इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार के नामों की सिफारिश की।

सुप्रीम कोर्ट में अभी कितने हैं स्वीकृत पद?
सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश (सीजीआई) समेत 34 न्यायाधीशों के स्वीकृत पद हैं। वर्तमान में शीर्ष अदालत 27 न्यायाधीशों के साथ काम कर रही है। पीठ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम द्वारा सिफारिश किए गए नामों को मंजूरी देने में केंद्र की ओर से कथित देरी से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी। वेंकटरमणी ने पीठ को आश्वासन दिया कि नामों की नियुक्ति का वारंट जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। पीठ ने पूछा, ”कब, अगला सवाल है? हम तारीख के बारे में नहीं कह रहे हैं। दो दिन, तीन दिन या चार दिन, वारंट कब जारी होगा?”

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मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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