पानी वाले साहब का जलवा सरकारी फंड से तान दिया 16 कमरों का शीशमहल
आजकल जिले में पदस्थ एक जल वाले साहब का नया नवेला शीशमहल पूरे महकमे में गॉसिप का हॉट टॉपिक बना हुआ है। भई पानी वाले विभाग में हैं तो पैसों की धार भी पानी की तरह ही बहेगी न। सुना है साहब ने कलेक्टर महोदय के बंगले से भी बड़ा और आलीशान महल तान दिया है। पहले जिस बंगले में कुल जमा चार कमरे हुआ करते थे अब वहां 16 कमरों का भव्य दरबार सज गया है।
सिक्योरिटी ऐसी कि परिंदा भी पर न मार सके। बाहर 24 घंटे एक गार्ड तंबू गाड़े खड़ा रहता है। और तो और मैनपावर कंपनी के आठ आठ कर्मचारी साहब के यहां हुजूरी बजा रहे हैं। बंगले के भीतर क्या पक रहा है कोई झांक न पाए इसके लिए बाउंड्रीवाल पर तीन तीन फीट के नीले शेड भी ठुकवा दिए गए हैं। अब साहब ने यह माया किस मद से खर्च की है इसकी भनक किसी को नहीं है। बस सब दूर से देखकर भौचक्के हैं।
कुर्सी बचाने बाबा की शरण में कलेक्टर साहब 50 लाख की पूजा कर हो गए नदारद
कुर्सी का मोह और मन की शांति दोनों एक साथ कहां मिलती है। लेकिन अपने एक कलेक्टर साहब इसी चक्कर में एक बंगाली बाबा के फेर में पड़ गए हैं। उनके एक परम मित्र ने बड़े पद की लालसा भांपते हुए उन्हें इस बाबा से मिलवा दिया। पहले तो बाबा ने साहब से कामाख्या मंदिर में पूरे 50 लाख की पूजा करवा डाली। अब नवरात्रि में नौ दिन की छुट्टी मार कर साहब फिर से जिले से नदारद हैं।
खबर उड़ी है कि वे किसी गुप्त मंदिर में बैठकर लंबा चौड़ा हवन कर रहे हैं। बाबा ने भी फुल गारंटी दे दी है कि हवन कुंड में आहुति पड़ते ही तुम्हारी हर मुराद पूरी हो जाएगी। बाबा का तो यहां तक दावा है कि पिछली पूजा का ही प्रताप था कि साहब के हाथ से जिला नहीं गया बल्कि एक और बड़ा जिला मिल गया। अब देखना है बाबा का यह नया टोटका साहब को कौन सी गद्दी दिलाता है।
जमीन के फेर में भिड़े मंत्री और सचिव मैडम ने बायपास कर पास कर दिए 44 करोड़
सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक मंत्री जी और उनकी सचिव मैडम के बीच चल रहे कोल्ड वॉर के खूब चर्चे हैं। किस्सा कुछ यूं है कि मंत्री जी बड़ी चालाकी से सरकारी जमीन अपनी कुछ संस्थाओं के नाम करवाना चाह रहे थे। पर सचिव मैडम ठहरीं कायदे कानून वाली उन्होंने तपाक से आपत्ति लगा दी। फिर क्या था मंत्री जी ने अपनी पार्टी का रौब झाड़ते हुए मैडम पर सारा गुस्सा उतार दिया।
लेकिन मैडम भी कहां चुप बैठने वाली थीं वे भी आग बबूला हो उठीं। अब हालत यह है कि मैडम इतनी खफा हैं कि मंत्री जी को बायपास करके ही धड़ाधड़ फैसले ले रही हैं। हाल ही में एक टेंडर का कार्यादेश मंत्री जी से पूछे बिना ही जारी कर दिया गया। यही नहीं दूसरे विभाग को 44 करोड़ रुपए भी चुपके से भेज दिए गए। बेचारे मंत्री जी अब बस हाथ मलते रह गए हैं।
मैडम मुझे लाई हैं का भौकाल झाड़ रहे थे साहब तभी थमा दिया नया ट्रांसफर ऑर्डर
ट्रांसफर के इस खेल में राज्य प्रशासनिक सेवा के एक साहब इन दिनों पूरी तरह चक्करघिन्नी बन चुके हैं। पहले उन्हें मंत्री जी के बंगले से बेदखल कर मंत्रालय भिजवाया गया। वहां पहुंचे तो सीनियर अफसरों ने ऐसी चाल चली कि उन्हें उस विभाग में निपटा दिया जहां पहले से ही दो दो डिप्टी सेक्रेटरी जमे बैठे थे।
साहब ने हर जुगाड़ लगाकर आदेश वापस कराने की खूब माथापच्ची की पर दाल नहीं गली। उल्टे उन्हें उठाकर एक दूसरे ही विभाग में पटक दिया गया। वहां पहुंचते ही साहब ने भौकाल टाइट करना शुरू किया और सबको सीना चौड़ा करके बताने लगे कि मुझे तो खुद सचिव मैडम स्पेशल डिमांड पर लाई हैं। उनका यह डायलॉग खत्म ही हुआ था कि ऊपर से नया फरमान आ गया और उन्हें अपर कलेक्टर बनाकर जिले में रवाना कर दिया गया। अब साहब जिले में बैठकर अपना माथा पीट रहे हैं।
