नौकरी का झांसा, तोमर का रिश्तेदार होने का दावा और ₹1.5 लाख की मांग! भोपाल में ठगी के आरोप से मचा हड़कंप
भोपाल। सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर लोगों से पैसे मांगने का एक मामला राजधानी भोपाल में चर्चा में है। आरोप है कि एक व्यक्ति मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का रिश्तेदार होने का दावा कर लोगों पर प्रभाव जमाता था और नौकरी लगवाने के नाम पर डेढ़ लाख रुपये तक की मांग करता था। मामले में महिला समेत कई लोगों से रकम लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसी बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद होने के बाद व्यक्ति के साथ मारपीट की घटना सामने आई है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पैसे मांगने का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर खुद को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का रिश्तेदार बताकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। आरोप है कि इसी पहचान और भरोसे का इस्तेमाल कर वह लोगों से रुपये मांगता था। एक नौकरी के बदले डेढ़ लाख रुपये मांगे जाने की बात सामने आई है। महिला समेत कई लोगों से पैसे लेने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक सामने आई जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने लोगों ने रकम दी और कितनी राशि का लेन-देन हुआ।
पैसों के विवाद के बाद मारपीट
बताया जा रहा है कि रुपये के लेन-देन या रकम वापस करने को लेकर विवाद बढ़ गया, जिसके बाद व्यक्ति के साथ मारपीट की गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो को भोपाल के टीटी नगर थाना क्षेत्र स्थित माता मंदिर इलाके का बताया जा रहा है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और घटना की पूरी परिस्थितियों की जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
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पुलिस की कार्रवाई पर टिकी नजरें
मामले में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि, शिकायत और दर्ज प्रकरण से जुड़ी जानकारी फिलहाल स्पष्ट नहीं है। यह भी पता लगाया जाना बाकी है कि कथित रूप से पैसे लेने वाले व्यक्ति ने कितने लोगों को नौकरी का भरोसा दिया था और इस मामले में अब तक कोई कानूनी कार्रवाई हुई है या नहीं। यदि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने की शिकायत सही पाई जाती है, तो जांच में कथित लेन-देन, नौकरी दिलाने के दावे और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका अहम होगी।फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों और वायरल वीडियो को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
