सस्पेंडेड IPS डांगी यौन शोषण केस: आरोप प्रमाणित होने पर चार्जशीट जारी; पीड़िता की आपत्ति के बाद हटे प्रशांत अग्रवाल, अब पारुल माथुर रखेंगी पक्ष
प्राथमिक जांच में आईपीएस रतन लाल डांगी पर लगे यौन शोषण के आरोप सही पाए गए हैं, डीजीपी ने हाईकोर्ट में दी जानकारी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित यौन शोषण मामले में निलंबित आईपीएस रतन लाल डांगी की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। पुलिस मुख्यालय (PHQ) स्तर पर हुई प्राथमिक जांच में डांगी के खिलाफ लगे आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं। इसके आधार पर राज्य शासन ने उनके खिलाफ आधिकारिक रूप से आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी कर दिया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में शासन की ओर से जवाब पेश करते हुए यह अहम जानकारी दी है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच की दिशा भी बदल गई है। मामले में पहले प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में आईपीएस प्रशांत अग्रवाल की नियुक्ति की गई थी। लेकिन पीड़िता ने जांच में पक्षपात और डांगी को बचाने का आरोप लगाते हुए इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इस तीखी आपत्ति के बाद गृह विभाग को अपना फैसला बदलना पड़ा और अब आईपीएस प्रशांत अग्रवाल की जगह आईपीएस पारुल माथुर को विभाग का पक्ष रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही, एडीजी दीपांशु काबरा को मामले का जांच अधिकारी (IO) नियुक्त किया गया है। शासन के इन अहम कदमों के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला? 7 साल तक शारीरिक और मानसिक शोषण का आरोप
पुलिस विभाग में ही पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की पत्नी ने निलंबित आईपीएस रतन लाल डांगी पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को सीधे पुलिस मुख्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उसने खुलासा किया था कि आईपीएस डांगी पिछले 7 सालों से उसका शारीरिक और मानसिक शोषण कर रहे हैं। इन संगीन आरोपों के सार्वजनिक होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने तत्काल आदेश जारी कर डांगी को पद से हटाया और बाद में उन्हें सस्पेंड कर दिया। हालांकि, डांगी इन आरोपों को लगातार झूठा बताते रहे हैं।
पीड़िता की आपत्ति: 'जांच निष्पक्ष नहीं, महिला अफसर को सौंपें जिम्मेदारी'
शुरुआती जांच के दौरान ही पीड़िता ने पुलिस विभाग की कार्रवाई की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए थे। उसका आरोप था कि रतन लाल डांगी को महकमे के भीतर ही बचाने की कोशिश की जा रही है। पीड़िता ने स्पष्ट मांग की थी कि महिला अपराध से जुड़े इतने संवेदनशील मामले की जांच किसी महिला आईएएस या आईपीएस अधिकारी से ही कराई जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर कोर्ट ने राज्य शासन के गृह सचिव और डीजीपी से जवाब तलब किया था।
वकील और डीजीपी का पक्ष: कोर्ट में क्या हुआ?
पीड़िता के वकील अभिषेक पांडेय ने स्पष्ट किया कि 14 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान डीजीपी ने अपना जवाब पेश किया। डीजीपी ने कोर्ट को बताया कि "प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद सस्पेंडेड आईपीएस रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर दिया गया है।" इसके साथ ही कोर्ट को एडीजी दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाए जाने और महिला अफसर पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त करने की आधिकारिक जानकारी दी गई।
विवादों से पारुल माथुर का भी रहा है पुराना नाता
इस मामले में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहीं आईपीएस पारुल माथुर का भी विवादों से नाता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार के दौरान, पारुल माथुर पर बहुचर्चित 'कोल लेवी घोटाले' में शामिल होने के आरोप लगे थे। उस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे पूछताछ भी की थी, और उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के लिए बाकायदा नोटिस भी जारी किया गया था। अब इसी पृष्ठभूमि वाली अफसर इस संवेदनशील यौन शोषण मामले में शासन का पक्ष रखेंगी।
