सूडा के नोटिस में बड़ा खुलासा: 40 नगरीय निकायों में 400 करोड़ के विकास कार्य सिर्फ फाइलों में, 2018 से चल रही कागजी खानापूर्ति; पोर्टल पर भी फर्जीवाड़ा
प्रशासनिक रिपोर्टर | रायपुर प्रदेश के 40 नगरीय निकायों में विकास कार्यों के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा और घोर लापरवाही सामने आई है। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) की हालिया समीक्षा में यह खुलासा हुआ है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच स्वीकृत करीब 400 से 440 करोड़ रुपए के विकास कार्य अब तक जमीन पर पूरे नहीं हुए हैं। हालात ये हैं कि हर एक निकाय में औसतन 10 से 11 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट सिर्फ कागजों पर रेंग रहे हैं। ठेकेदारों और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से काम की समयसीमा खत्म होने के बावजूद इन्हें पोर्टल पर सिर्फ 'निर्माणाधीन' दिखाकर खानापूर्ति की जा रही है। सूडा ने इस भारी लापरवाही को पकड़ते हुए सभी 40 निकायों के अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर पोर्टल पर भौतिक सत्यापन के साथ वास्तविक स्थिति अपलोड करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है।
पोर्टल पर डेटा गायब, भौतिक सत्यापन में खुली पोल
सूडा द्वारा जारी किए गए नोटिस और विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, इन 40 निकायों में सामुदायिक भवन, सीसी रोड, ड्रेनेज सिस्टम और सार्वजनिक उपयोग के अन्य निर्माण कार्य वर्षों से लंबित हैं। हैरानी की बात यह है कि राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत स्वीकृत इन कार्यों की प्रगति का कोई भी अपडेट विभागीय पोर्टल पर मौजूद नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, जब मुख्यालय स्तर पर कुछ प्रोजेक्ट्स की फाइलों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया गया, तो पता चला कि जिन कार्यों को महीनों पहले पूरा हो जाना चाहिए था, उनका बेस वर्क तक ठीक से नहीं हुआ है। निकायों के संबंधित अधिकारियों को बार-बार ताकीद किए जाने के बावजूद न तो ठेकेदारों पर पेनाल्टी लगाई गई और न ही काम में तेजी लाने के कोई प्रयास हुए। स्वीकृत कार्यों की प्रगति पोर्टल पर अपलोड न होना सीधे तौर पर मॉनिटरिंग में लापरवाही और फंड के दुरुपयोग की ओर इशारा कर रहा है।
जवाबदेही तय करने के निर्देश, अधिकारियों में मचा हड़कंप
नगरीय प्रशासन विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। निकायों को जारी नोटिस में साफ तौर पर लिखा है कि निर्माणाधीन कार्यों की वर्तमान स्थिति, अब तक हुई प्रगति और देरी के कारणों की स्पष्ट व बिंदुवार जानकारी उपलब्ध कराई जाए। सूडा के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित तीन दिनों के भीतर पोर्टल पर आवश्यक जानकारी अपडेट नहीं करने और कार्यों में बेवजह देरी पाए जाने पर सीधे जवाबदेही तय की जाएगी। इस सख्ती और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी के बाद से 40 निकायों के सीएमओ (मुख्य नगर पालिका अधिकारी) और इंजीनियरों में हड़कंप मचा हुआ है।
बिना काम के भुगतान का भी संदेह
जांच में यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि कई ठेकेदारों ने शुरुआत में ही एडवांस या पहले दो रनिंग बिल का भुगतान ले लिया और उसके बाद साइट पर काम बंद कर दिया। स्थानीय अधिकारी साइट का निरीक्षण किए बिना ही फाइलों को आगे बढ़ाते रहे। अब तीन दिन में जो रिपोर्ट आएगी, उसमें जारी किए गए भुगतान और काम के वास्तविक प्रतिशत का मिलान किया जाएगा।
2018 से फाइलों में दब रहे मामले
दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 से लेकर 2024-25 तक के काम लंबित पड़े हैं। हर साल निकायों को नया बजट आवंटित होता गया, लेकिन पुराने काम पूरे नहीं किए गए। ऑडिट के दौरान भी इन अधूरे कामों पर आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आ रही है, जिन्हें स्थानीय स्तर पर कागजी खानापूर्ति कर दबा दिया गया।
जनता से जुड़ी सुविधाओं पर सीधा असर
इन निकायों में जो काम अटके हैं, उसका सीधा असर स्थानीय नागरिकों पर पड़ रहा है। सामुदायिक भवन जैसे सार्वजनिक उपयोग के निर्माण कार्य समय पर पूरे नहीं होने से लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिलने में देरी हो रही है। सूडा ने माना है कि केवल बजट स्वीकृत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्राउंड जीरो पर उसकी निगरानी भी जरूरी है।
विभाग अब उन ठेकेदारों की सूची भी तैयार कर रहा है, जिन्होंने एक से अधिक निकायों में टेंडर लिए और समयसीमा खत्म होने के बाद भी काम अधूरा छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि तीन दिन बाद जब पोर्टल पर जानकारी अपडेट होगी, तो संतोषजनक जवाब न मिलने पर कई ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय जांच (डीई) भी प्रस्तावित की जा सकती है।
