तबादलों में बड़ा गोलमाल: 1000 शिक्षकों के ट्रांसफर, 350 की पोस्टिंग का हिसाब ही गायब; शिक्षा संचालनालय का डीईओ को 3 दिन का अल्टीमेटम
विभाग को जानकारी नहीं: बिना रिकॉर्ड प्रमोशन की तैयारी से फंसा पेंच, स्कूलों में नई जगह पद ही खाली नहीं
सिटी रिपोर्टर | रायपुर शिक्षा विभाग में पिछले छह महीने के भीतर हुए 1000 से ज्यादा शिक्षकों के तबादलों में भारी विभागीय लापरवाही का मामला सामने आया है। हालत यह है कि राज्य के शिक्षा संचालनालय (मुख्यालय) के पास इस बात का कोई पुख्ता रिकॉर्ड ही नहीं है कि किस स्कूल में कितने पद खाली बचे हैं और कहां शिक्षक तैनात किए जा चुके हैं। कुल तबादलों में से करीब 350 शिक्षकों की पोस्टिंग का जिम्मा सीधे जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) पर छोड़ा गया था, लेकिन डीईओ दफ्तरों ने पदस्थापना के बाद मुख्यालय को कोई डेटा नहीं भेजा। अब जब विभाग सहायक शिक्षकों और शिक्षकों के प्रमोशन की तैयारी कर रहा है, तो जिलेवार खाली पदों का आंकड़ा ही गायब मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार को महानदी भवन से आदेश जारी कर सभी डीईओ और संयुक्त संचालकों से ऑनलाइन रिपोर्ट तलब की गई है। इस पूरी रिपोर्ट को पोर्टल पर अपडेट करने के लिए महज 3 दिन का सख्त अल्टीमेटम दिया गया है।
एक ही पद पर दो शिक्षकों की दावेदारी का खतरा
बुधवार को जारी आदेश के दस्तावेजों से पता चलता है कि तबादलों के बाद शिक्षा विभाग में अव्यवस्था चरम पर है। कुछ शिक्षक जब नई पदस्थापना वाले स्कूलों में पहुंचे, तो वहां पहले से ही शिक्षक मौजूद थे और कोई पद खाली ही नहीं था। वहीं दर्जनों शिक्षकों ने नई जगह ज्वाइन ही नहीं किया है और वे अपनी पुरानी जगह पर ही सेवाएं दे रहे हैं। डीईओ कार्यालयों ने इन शिक्षकों का ऑनलाइन रिकॉर्ड भी अपडेट नहीं किया। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि बिना रिकॉर्ड सुधारे प्रमोशन कर दिया गया, तो एक ही स्कूल में एक पद पर दो शिक्षक हो जाएंगे। इससे वेतन आहरण की प्रक्रिया बुरी तरह उलझ जाएगी। इसी के चलते अब हर तबादले का अंतिम वेतन प्रमाणपत्र और ज्वाइनिंग स्टेटस अनिवार्य रूप से मांगा गया है।
वरिष्ठता सूची और प्रमोशन पर लगा ब्रेक
पिछले छह माह के दौरान हुए इन तबादलों में अधिकारियों की मनमानी की परतें अब खुल रही हैं। नियमानुसार पदस्थापना के तुरंत बाद पोर्टल पर शिक्षकों का रिकॉर्ड अपडेट होना चाहिए था, लेकिन फाइलों को जिला स्तर पर ही रोक दिया गया। वर्तमान में विभाग को जिलेवार रिक्त पदों की संख्या और उनकी रैंक का स्पष्ट ब्योरा चाहिए ताकि वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की जा सके। संचालनालय ने साफ निर्देश दिया है कि जिन शिक्षकों का तबादला हुआ है, उनके पदभार ग्रहण करने की सटीक जानकारी के बिना प्रमोशन लिस्ट जारी करना संभव नहीं है।
सेटिंग से पुरानी जगह पर ही जमे हैं कई शिक्षक
इस पूरी लापरवाही के पीछे एक बड़ा खेल यह भी सामने आ रहा है कि कुछ रसूखदार शिक्षक तबादला आदेश जारी होने के बावजूद जानबूझकर रिलीव नहीं हुए। सेटिंग के चलते वे पुरानी जगह पर ही जमे हुए हैं और डीईओ कार्यालय ने भी इस पर चुप्पी साध रखी है। अब 3 दिन के अल्टीमेटम और वेतन प्रमाणपत्र मांगे जाने से इन शिक्षकों की असल स्थिति का राज खुलने का डर है।
बिना ज्वाइनिंग के महीनों से अटका वेतन
जिन शिक्षकों ने नियमों का पालन करते हुए नई जगह आमद दी है, उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। नई जगह के प्राचार्यों ने पद रिक्त न होने का हवाला देकर ज्वाइनिंग कराने से ही इनकार कर दिया है। इसके चलते कई शिक्षकों के पिछले महीनों का वेतन अटक गया है और वे जिला दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
शहरी इलाकों में नियमों की अनदेखी
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, 350 शिक्षकों की पोस्टिंग का अधिकार डीईओ को मिलने के बाद मनचाहे स्कूलों में पदस्थापना दी गई। शहर और उसके आसपास के स्कूलों को भर दिया गया, जबकि दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में पद खाली ही रह गए। अब नई रिपोर्ट में यह पूरा खेल सामने आ सकता है।
प्रमोशन से पहले होगी फिजिकल वेरिफिकेशन
इस पूरे मामले में अब मुख्यालय स्तर पर एक विशेष स्क्रूटनी टीम बनाए जाने की तैयारी है। 3 दिन बाद डीईओ से जो भी रिपोर्ट मिलेगी, टीम उसका मिलान पुराने रिकॉर्ड से करेगी। गड़बड़ी या गलत डेटा अपलोड करने की स्थिति में संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई की जा सकती है। इसके बाद ही प्रमोशन की रुकी हुई प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
