अब छुपना मुश्किल! AI मिनटों में खोज सकता है सोशल मीडिया यूजर्स की असली पहचान

अब छुपना मुश्किल! AI मिनटों में खोज सकता है सोशल मीडिया यूजर्स की असली पहचान

इंटरनेट पर गुमनाम रहना अब उतना सुरक्षित नहीं रह गया है जितना पहले माना जाता था. एक नई रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि जनरेटिव एआई की मदद से हैकर्स अब सोशल मीडिया पर छिपी असली पहचान का पता लगा सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक AI मॉडल अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर साझा की गई छोटी-छोटी जानकारी को जोड़कर किसी यूजर की असली पहचान तक पहुंच सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर बड़ी चिंता पैदा हो गई है.

AI रिसर्च में चौंकाने वाला दावा
नई रिसर्च में बताया गया है कि आधुनिक AI तकनीक अब पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हो गई है. इस तकनीक की मदद से इंटरनेट पर मौजूद छोटी-छोटी जानकारियों को जोड़कर किसी व्यक्ति की पहचान का अनुमान लगाया जा सकता है. रिसर्च के अनुसार, लोग अक्सर सोशल मीडिया पर सामान्य और मासूम दिखने वाली जानकारी शेर करते हैं. लेकिन जब यही जानकारी कई प्लेटफॉर्म पर मौजूद डेटा के साथ जुड़ती है तो AI उसके आधार पर असली पहचान तक पहुंच सकता है. इससे ऑनलाइन गुमनामी का दावा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है.

कैसे AI ने गुमनाम अकाउंट की पहचान खोजी
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया जिसमें एक गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट को AI मॉडल के सामने रखा गया. इसके बाद AI को निर्देश दिया गया कि वह इंटरनेट पर उपलब्ध हर संभव जानकारी को खोजे और उसका एनालिसिस करे. उदाहरण के तौर पर उस गुमनाम यूजर ने अपने पोस्ट में स्कूल की परेशानी और अपने कुत्ते Biscuit को Dolores Park में घुमाने का जिक्र किया था. AI ने इन छोटी-छोटी जानकारियों के आधार पर अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर खोज की और आखिरकार उस अकाउंट को एक वास्तविक व्यक्ति की पहचान से जोड़ने में काफी हद तक सफलता हासिल कर ली.

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एक्सपर्ट्स की चेतावनी, प्राइवेसी के लिए नया खतरा
रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि पहले इस तरह की डिजिटल जांच करने के लिए काफी तकनीकी ज्ञान और संसाधनों की जरूरत होती थी. लेकिन अब बड़े भाषा मॉडल यानी LLM की वजह से यह काम काफी आसान और सस्ता हो गया है. अब केवल इंटरनेट कनेक्शन और सार्वजनिक AI टूल्स की मदद से भी कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी जुटा सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार यह स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि इंटरनेट पर वास्तव में कौन-सी जानकारी निजी मानी जा सकती है.

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साइबर अपराधी कैसे उठा सकते हैं फायदा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस तकनीक का गलत इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर कुछ सरकारें AI की मदद से गुमनाम एक्टिविस्ट या विरोध करने वाले लोगों की पहचान पता लगा सकती हैं. इसके अलावा साइबर अपराधी भी इस जानकारी का इस्तेमाल अत्यधिक निजी और भरोसेमंद दिखने वाले ऑनलाइन फ्रॉड करने में कर सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति की पहचान और निजी जानकारी सामने आ जाए तो उसे निशाना बनाना आसान हो जाता है.

बचाव का क्या है तरीका?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस खतरे से निपटने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को पहले कदम उठाने होंगे. प्लेटफॉर्म्स को यूजर डेटा तक पहुंच सीमित करनी होगी और ऐसे बॉट्स को पहचानना होगा जो बड़े पैमाने पर डेटा स्क्रैप करते हैं. इसके साथ ही यूजर्स को भी इंटरनेट पर अपनी निजी जानकारी शेयर करते समय ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. छोटी-छोटी बातें जैसे लोकेशन, दैनिक गतिविधियां या निजी जानकारी भी कई बार पहचान उजागर करने में मदद कर सकते हैं. इसलिए डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए सोच-समझकर जानकारी साझा करना बेहद जरूरी है.

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