छत्तीसगढ़: फॉरेंसिक सिस्टम बेपटरी, 28 कर्मचारियों की पोस्टिंग अटकी, महीने भर से नई लैब में कोई जांच नहीं
रायपुर. छत्तीसगढ़ में गंभीर अपराधों की जांच व्यवस्था इन दिनों बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पुलिस को वैज्ञानिक सबूत जुटाने में मदद करने वाली फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की जमीनी हकीकत दावों से बिल्कुल उलट है। राज्य में 28 संविदा कर्मचारियों का कार्यकाल तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें पोस्टिंग नहीं मिली है। दूसरी ओर, करोड़ों खर्च कर बनाई गई नई लैब्स में स्टाफ और किट के अभाव में काम ठप पड़ा है।
जिलों में सीन ऑफ क्राइम की कार्रवाई हुई सुस्त
राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने हाल ही में अपने 28 कर्मचारियों को एक्सटेंशन दिया है। लेकिन एक्सटेंशन के 10 दिन बाद भी यह तय नहीं हो पाया है कि वे कहां काम करेंगे। कर्मचारियों की जिलों में तैनाती न होने का सीधा असर 'सीन ऑफ क्राइम' (घटनास्थल) की जांच पर पड़ रहा है।
सूत्रों की मानें तो स्टाफ की इस कमी के कारण पिछले एक महीने से कई बड़े और गंभीर मामलों में फॉरेंसिक टीम समय पर मौके पर पहुंच ही नहीं पा रही है। घटनास्थल पर देरी से पहुंचने के कारण सबूतों के साथ छेड़छाड़ का खतरा रहता है, जिसका सीधा असर पुलिस की जांच और कोर्ट में केस की मजबूती पर पड़ता है।
नए कानून बीएनएसएस (BNSS) का उड़ रहा मजाक....
फॉरेंसिक विशेषज्ञों की इस कमी के कारण नए कानून के अहम नियमों का भी पालन नहीं हो पा रहा है। हाल ही में लागू हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 176 (3) में एक स्पष्ट नियम बनाया गया है। इसके अनुसार, जिन अपराधों में सात साल या उससे ज्यादा की सजा का प्रावधान है, वहां घटनास्थल पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना अनिवार्य है। इसके बावजूद, पर्याप्त स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते प्रदेश के कई जिलों में इस नियम का प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो पा रहा है।
रायगढ़ लैब: सिर्फ नाम की प्रयोगशाला, एक भी जांच नहीं
प्रदेश सरकार ने जांच में तेजी लाने के मकसद से हाल ही में रायगढ़ में एक नई फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला शुरू की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थापना के करीब एक महीना बीत जाने के बाद भी यहां एक भी मामले की जांच नहीं हो पाई है। इसका सबसे बड़ा कारण वैज्ञानिक और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी है। रायगढ़ लैब के प्रभारी अधिकारी ने भी खुद इस बात को स्वीकार किया है कि पर्याप्त मानव संसाधन न होने की वजह से लैब में नियमित जांच का काम शुरू नहीं किया जा सका है।
रायपुर और बिलासपुर में केमिकल किट का टोटा
फॉरेंसिक जांच की यह बदहाली सिर्फ रायगढ़ तक सीमित नहीं है। राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर स्थित बड़ी फॉरेंसिक लैब्स का भी यही हाल है। यहां भी कई तरह की महत्वपूर्ण जांचें अटकी पड़ी हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, इन प्रयोगशालाओं को जांच के लिए जरूरी केमिकल किट और अन्य सामग्रियां समय पर नहीं मिल पा रही हैं।
कुल मिलाकर, एक तरफ पुलिस हाईटेक जांच के दावे कर रही है, तो दूसरी तरफ संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण फॉरेंसिक विभाग खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है।
