'क्या मैं आतंकवादी हूं?' गिरफ्तारी के बाद उदयनिधि का TVK सरकार पर बड़ा हमला, 3 हजार पुलिसकर्मियों का किया जिक्र

'क्या मैं आतंकवादी हूं?' गिरफ्तारी के बाद उदयनिधि का TVK सरकार पर बड़ा हमला, 3 हजार पुलिसकर्मियों का किया जिक्र

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में उस समय सियासी हलचल तेज हो गई जब विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी को लेकर राज्यभर में बहस छिड़ गई। सत्ता पक्ष की कार्रवाई को लेकर केवल डीएमके ही नहीं, बल्कि कई विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए। विरोधी दलों का कहना है कि उदयनिधि के बयान से असहमति हो सकती है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं थी।

गिरफ्तारी के बाद उदयनिधि ने TVK सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्हें डराने और राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि 3 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती कर उन्हें ऐसे ले जाया गया मानो वे कोई आतंकवादी हों, जबकि मामला केवल एक राजनीतिक भाषण से जुड़ा था।

गिरफ्तारी पर गरमाई तमिलनाडु की राजनीति
उदयनिधि की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। जहां डीएमके ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया, वहीं कई विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई को अनावश्यक और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित करार दिया। हालांकि कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि सार्वजनिक मंचों पर नेताओं को अपनी भाषा और शब्दों के चयन में संयम बरतना चाहिए, लेकिन गिरफ्तारी इसका समाधान नहीं हो सकती।

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एमके स्टालिन ने बेटे का किया बचाव, सरकार पर लगाया बड़ा आरोप
डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। बैठक के बाद जारी बयान में उन्होंने कहा कि उदयनिधि के भाषण में ऐसा कोई कथन नहीं था जिससे किसी व्यक्ति या समुदाय का अपमान होता हो। स्टालिन ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है ताकि कावेरी जल विवाद समेत अन्य अहम जनसरोकारों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। उन्होंने कहा, "अहंकार हमेशा विनाश की ओर ले जाता है। विपक्ष के नेता की गिरफ्तारी सरकार के उसी अहंकार का प्रतीक है। लोकतंत्र में असहमति का जवाब पुलिस कार्रवाई नहीं हो सकता।"

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TVK नेताओं ने गिरफ्तारी का किया समर्थन
जहां डीएमके सरकार पर हमलावर रही, वहीं TVK नेताओं ने उदयनिधि के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। उनका कहना है कि किसी भी नेता को सार्वजनिक मंच से ऐसे बयान देने का अधिकार नहीं है जिससे सामाजिक या राजनीतिक विवाद पैदा हो।

विरोधी दलों ने भी उठाए सवाल
राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा कि उदयनिधि को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए था, लेकिन बजट सत्र से ठीक पहले उनकी गिरफ्तारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली कार्रवाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा में विपक्ष की प्रभावी मौजूदगी कम करने की कोशिश कर रही है। वहीं डीएमडीके महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने इस कार्रवाई की तुलना औपनिवेशिक दौर के उन कानूनों से की जिनका इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दबाने के लिए किया जाता था।

पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संवाद होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट द्वारा तत्काल गिरफ्तारी से बचने की सलाह दिए जाने के बावजूद पुलिस ने जल्दबाजी दिखाई। वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अदालत ने तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने जैसी टिप्पणी की थी, तो पुलिस ने इतनी जल्द कार्रवाई क्यों की। उन्होंने इसे स्वीकार्य नहीं बताया।

"मुझे आतंकवादी की तरह ले जाया गया" – उदयनिधि
गिरफ्तारी के बाद त्रिची एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि वे इस मामले से डरने वाले नहीं हैं और अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा, "सरकार ने अदालत से कहा कि मुझे सिर्फ पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जा रहा है, लेकिन इसके लिए 3 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों को लगाया गया। मुझे चेन्नई से तंजावुर ऐसे ले जाया गया जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं। जनता के टैक्स का पैसा केवल राजनीतिक बदले की भावना में खर्च किया गया।"

विवादित भाषण पर दी सफाई
अपने बयान को लेकर उठे विवाद पर उदयनिधि ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय का अपमान करना नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। उनके अनुसार कई नेताओं ने पूरा भाषण सुने बिना ही प्रतिक्रिया दे दी और सरकार ने उसी का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की।

किसानों के समर्थन का भी किया जिक्र
उदयनिधि ने दावा किया कि तंजावुर में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए उनके भाषण को वहां मौजूद लोगों का व्यापक समर्थन मिला था। उनका आरोप है कि इसी लोकप्रियता से घबराकर सरकार ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया ताकि असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाया जा सके। उन्होंने कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का पूरी मजबूती से सामना करेंगे और इसे राजनीतिक लड़ाई के रूप में भी जनता के बीच ले जाएंगे।

मामला क्यों बना सियासी मुद्दा?
तमिलनाडु में यह मामला अब केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विपक्ष की भूमिका और राजनीतिक प्रतिशोध जैसे बड़े मुद्दों से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र और अदालत की कार्यवाही के बीच यह विवाद राज्य की राजनीति को और गर्मा सकता है।

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