Jharkhand Student Protest: भर्ती घोटालों पर झारखंड में उबाल, 11वें दिन भी सड़कों पर छात्र; विधानसभा घेराव का ऐलान, सरकार पर बढ़ा दबाव
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में हजारों छात्र पिछले 11 दिनों से सत्याग्रह पर डटे हुए हैं। आंदोलन अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पिछले कई वर्षों में हुई विवादित भर्तियों की निष्पक्ष जांच और भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग का रूप ले चुका है। छात्रों ने सरकार को चेतावनी देते हुए 6 और 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। ऐसे में राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल भी तेज हो गई है।
क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि पिछले 4 से 5 वर्षों में हुई 10 से अधिक भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। छात्रों की प्रमुख मांगें हैं-
- सभी विवादित भर्तियों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच।
- जांच किसी दूसरे राज्य के हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पैनल से कराई जाए।
- भर्ती घोटालों में शामिल अधिकारियों और दलालों पर सख्त कार्रवाई।
- भविष्य की परीक्षाओं के लिए पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह भर्ती प्रणाली लागू की जाए।

'नौकरियां बिक रही हैं'— छात्रों के गंभीर आरोप
आंदोलनकारी छात्रों और विभिन्न युवा संगठनों ने आरोप लगाया है कि राज्य में सरकारी नौकरियों के नाम पर संगठित तरीके से भ्रष्टाचार किया जा रहा है।उनका दावा है कि कई भर्तियों में कथित तौर पर 25 लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक में पदों का सौदा किया जाता है। छात्रों का आरोप है कि JSSC-CGL परीक्षा से पहले पूरा प्रश्नपत्र चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया था। इसी तरह लेडी सुपरवाइजर भर्ती और उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर कर रहे प्रदर्शन
आंदोलन का एक अलग दृश्य भी देखने को मिला। छात्र झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीरें लेकर धरने पर बैठे हैं।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे झारखंड आंदोलन के मूल उद्देश्य युवाओं को न्याय और रोजगार की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। छात्र नेता अर्चना कुमारी ने कहा कि लगातार सामने आ रही भर्ती अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य संकट में डाल दिया है।
सरकार का क्या है रुख?
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है।
- उनके अनुसार, जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं और जैसे ही जांच पूरी होगी, उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाएगा।
- सरकार का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
CID ने तीन कथित दलालों को किया गिरफ्तार
भर्ती अनियमितताओं की जांच कर रही CID ने हाल ही में तीन कथित बिचौलियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये लोग कथित रूप से परीक्षा संचालन से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में थे और अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास करते थे। सीआईडी अब पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
आंदोलन ने बढ़ाया राजनीतिक दबाव
लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन ने राज्य की राजनीति को भी गर्मा दिया है। एक ओर छात्र सड़कों पर न्याय और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार जांच और कार्रवाई का भरोसा दे रही है। अब सबकी नजर 6 और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
