20 साल तक फरारी, पहचान बदली और सिस्टम को दिया चकमा! SBI घोटाले के फरार आरोपी आखिरकार चढ़े CBI के हत्थे

20 साल तक फरारी, पहचान बदली और सिस्टम को दिया चकमा! SBI घोटाले के फरार आरोपी आखिरकार चढ़े CBI के हत्थे

धनबाद। धनबाद के चर्चित SBI घोटाले में करीब दो दशक बाद हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी इतने लंबे समय तक कानून की पहुंच से बाहर कैसे रहे। सीबीआई ने 20 साल से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन इस मामले ने जांच और निगरानी तंत्र की चुनौतियों को भी उजागर कर दिया है।

सीबीआई के अनुसार, दोनों आरोपी वर्ष 2005 से फरार थे और कार्रवाई का दबाव बढ़ने पर नेपाल भाग गए थे। बताया जा रहा है कि भारत लौटने के बाद उन्होंने अपनी पहचान तक बदल ली और अलग-अलग राज्यों में रहकर गिरफ्तारी से बचते रहे। इस दौरान वे सामान्य जीवन जीते रहे, जबकि करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला वर्षों तक न्याय का इंतजार करता रहा।

मामला एसबीआई की धनबाद मुख्य शाखा से जुड़े करीब 1.25 करोड़ रुपये के कथित गबन और धोखाधड़ी का है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग कर सरकारी और वित्तीय संस्थानों को नुकसान पहुंचाया गया था। हैरानी की बात यह है कि घोषित अपराधी होने, रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने और इनाम घोषित होने के बावजूद आरोपी इतने लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचने में सफल रहे।

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सीबीआई की हालिया कार्रवाई तकनीकी निगरानी और मानव स्रोतों के जरिए संभव हो सकी। पिछले कुछ महीनों से एजेंसी लगातार उनके ठिकानों का पता लगाने में जुटी थी। गिरफ्तारी के बाद अब उम्मीद है कि मामले से जुड़े कई पुराने राज सामने आ सकते हैं और यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि फरारी के दौरान आरोपियों को किस तरह का सहयोग मिलता रहा।

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करीब 20 साल पुराने इस मामले ने एक बड़ा सवाल फिर खड़ा कर दिया है, आर्थिक अपराधों के आरोपी वर्षों तक पहचान बदलकर खुलेआम रह सकते हैं, तो ऐसे मामलों में जवाबदेही और निगरानी तंत्र कितना प्रभावी है? फिलहाल, दोनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जा रहा है और आगे की जांच जारी है।

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