Ankit Sharma Murder Case: दिल्ली दंगा केस में बड़ा फैसला, AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद
नई दिल्ली। फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। मामले में अन्य दोषियों को भी विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई गई है। अदालत ने इससे पहले 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया था।
कोर्ट ने कहा- यह समाज को झकझोर देने वाला अपराध
सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अंकित शर्मा की हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई और बाद में उनके शव को नाले में फेंक दिया गया। अदालत ने इसे "समाज को झकझोर देने वाला अपराध" बताया। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषियों के परिवार के आश्रित होने का तर्क सजा कम करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। हालांकि, अदालत ने मामले को उपलब्ध कानूनी मानकों के आधार पर देखते हुए मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अभियोजन ने मांगी थी फांसी की सजा
सजा पर बहस के दौरान विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत से कहा था कि यह हत्या पूरी तरह सुनियोजित, निर्मम और समाज में भय का माहौल पैदा करने वाली थी।अभियोजन पक्ष ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' बताते हुए सभी दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि ऐसे अपराधों में कठोरतम सजा समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
बचाव पक्ष ने कम सजा की अपील की
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अदालत से कहा कि यह मामला मृत्युदंड की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने दोषियों की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कम सजा देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और 31 जुलाई को सजा सुनाने की तारीख तय की थी।
'लॉन्च पैड' वाले तर्क पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ताहिर हुसैन के घर को दंगों का 'लॉन्च पैड' बताया था। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह तर्क इस मुकदमे में तय किए गए आरोपों का हिस्सा नहीं था, इसलिए सजा तय करते समय इसे आधार नहीं बनाया जा सकता। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोषसिद्धि के आधार पर ताहिर हुसैन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही विभिन्न धाराओं के तहत आर्थिक दंड (जुर्माना) भी लगाया गया।
क्या है पूरा मामला?
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान 26 फरवरी 2020 को आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा का शव चांदबाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। इस मामले की जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अब सजा भी सुना दी है।
