Amalaki Ekadashi 2026: क्या आमलकी एकादशी का व्रत रखने से पितृ दोष शांत होता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र

Amalaki Ekadashi 2026: क्या आमलकी एकादशी का व्रत रखने से पितृ दोष शांत होता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र

Amalaki Ekadashi ke Niyam: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की उपासना के लिए बेहद शुभ माना गया है. फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है. इस दिन आंवले के वृक्ष और भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है. मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर पापों का नाश होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या आमलकी एकादशी का व्रत रखने से पितृ दोष शांत होता है? आइए जानते हैं शास्त्रों में क्या कहा गया है.

आमलकी एकादशी कब है? (Amalaki Ekadashi 2026 Kab Hai)
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी रात 12 बजकर 33 मिनट से शुरू हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए इस साल आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजन किया जाएगा.

क्या पितृ दोष से मुक्ति मिलती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो तो उसे जीवन में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है. शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी व्रत करने, भगवान विष्णु का नाम जपने और आंवले के वृक्ष की पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है.

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स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और उसके कुल के पितरों को भी तृप्ति प्राप्त होती है. हालांकि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ दोष की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म भी आवश्यक माने गए हैं. इसलिए केवल एक व्रत ही नहीं, बल्कि नियमित धार्मिक कर्म और सत्कर्म भी जरूरी हैं.

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कैसे करें आमलकी एकादशी का व्रत?
सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें. आंवले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और जल अर्पित करें. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें. दिनभर व्रत रखकर फलाहार करें. ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान करें.

आमलकी एकादशी का महत्व
आमलकी एकादशी को विशेष रूप से भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा से जोड़ा गया है. मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु का वास होता है. इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है. सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है. पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है , साथ ही मानसिक शांति प्राप्त होती है. धार्मिक ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि इस दिन दान-पुण्य करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. नेशनल जगत विज़न इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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