विवादित 50 हजार पर ही रहेगा होल्ड, बाकी रकम तुरंत जारी करने का हाई कोर्ट का आदेश
बिलासपुर : साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन के नाम पर पूरी रकम रोक देने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है । जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि विवाद केवल एक निश्चित राशि तक सीमित है, तो पूरे बैंक खाते को होल्ड कर खाताधारक को उसकी वैध रकम के इस्तेमाल से रोकना उचित नहीं है । कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक को निर्देश दिया कि खाते में केवल विवादित 50 हजार रुपये तक ही लियन या होल्ड रखा जाए और बाकी गैर-विवादित रकम तत्काल जारी की जाए ।
मामला बालोद जिले के योगेंद्र कुमार मंडावी से जुड़ा है l वह सरकारी कर्मचारी हैं और भारतीय स्टेट बैंक की राजहरा शाखा में उनका वेतन खाता है । 25 दिसंबर 2024 को उनके भाई ने पुराना उधार चुकाने के लिए उनके खाते में 50 हजार रुपये जमा किए थे । बाद में भोपाल साइबर सेल ने कुछ साइबर शिकायतों की जांच के दौरान इस लेन-देन को संदिग्ध बताते हुए बैंक को रकम पर रोक लगाने के निर्देश दिए । साइबर सेल के निर्देश के बाद बैंक ने खाते पर होल्ड लगा दिया ।
याचिकाकर्ता का कहना था कि आपत्ति केवल 50 हजार रुपये के लेन-देन को लेकर थी, लेकिन बैंक ने पूरे खाते की रकम रोक दी । इससे उनके वेतन और पर्सनल लोन से प्राप्त रकम समेत करीब 1,99,816 रुपये खाते में फंस गए और वे रोजमर्रा के वित्तीय कामकाज के लिए अपने खाते का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे । याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि विवादित 50 हजार रुपये की राशि भी 17 दिसंबर 2025 को बैंक द्वारा खाते से काटी जा चुकी थी । इसके बावजूद खाते पर लगा पूरा होल्ड नहीं हटाया गया ।
विवादित रकम तक सीमित रहेगी रोक
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि साइबर जांच में विवादित रकम 50 हजार रुपये के लेन-देन तक ही सीमित है । कोर्ट ने कहा कि जब जांच किसी विशेष राशि से संबंधित है, तब पूरे बैंक खाते को रोककर रखना खाताधारक के नियमित वित्तीय कामकाज को अनावश्यक रूप से प्रभावित करता है । कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि खाते में केवल विवादित 50 हजार रुपये तक ही लियन या होल्ड रखा जाए । इसके अलावा खाते में मौजूद गैर-विवादित रकम को तत्काल जारी किया जाए, ताकि खाताधारक अपने वैध धन का उपयोग कर सके ।
साइबर जांच में सहयोग करना होगा
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि खाते से बाकी रकम जारी करने का आदेश याचिकाकर्ता को साइबर अपराध की जांच से मुक्त नहीं करता। उन्हें जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना होगा और जरूरत पड़ने पर आवश्यक दस्तावेज व जानकारी उपलब्ध करानी होगी । कोर्ट ने कहा कि यदि साइबर सेल या पुलिस अधिकारी जांच के सिलसिले में उन्हें उपस्थित होने के लिए बुलाते हैं, तो उन्हें कानून के अनुसार उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा ।
