खाड़ी में फिर तनाव चरम पर: Hormuz Strait पर ईरान का यू-टर्न, अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप
नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जहां Iran ने अहम समुद्री मार्ग Hormuz Strait पर अपनी नीति बदलते हुए आवाजाही पर दोबारा पाबंदियां लगा दी हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पहले इस जलडमरूमध्य को खोलने के संकेत दिए गए थे, लेकिन अमेरिकी रुख के बाद तेहरान ने तुरंत अपना फैसला पलट दिया। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से यह मार्ग बेहद संवेदनशील माना जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हलचल बढ़ने के संकेत हैं।
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने साफ किया है कि जब तक उसके बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सीमित या बाधित की जा सकती है। दूसरी ओर United States ने भी अपना सख्त रुख बरकरार रखते हुए कहा है कि ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति जारी रहेगी। इस टकराव ने क्षेत्र में सैन्य और आर्थिक अस्थिरता की आशंकाओं को फिर से बढ़ा दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया कि नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य मुद्दों पर समझौते के लिए तैयार नहीं होता। इसके जवाब में ईरान के शीर्ष नेताओं ने अमेरिकी बयानबाजी को भ्रामक बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि क्षेत्र की स्थिति का निर्धारण जमीनी हालात से होगा, न कि राजनीतिक बयानबाजी से।
विशेषज्ञों का मानना है कि Hormuz Strait पर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है, ऐसे में किसी भी तरह की रुकावट अंतरराष्ट्रीय बाजारों और कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देशों के बीच यह टकराव आगे किस दिशा में बढ़ता है।
