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Gold-Silver Crash: मिडिल ईस्ट युद्ध का असर, गोल्ड-सिल्वर में ऐतिहासिक गिरावट, 25 दिनों में 54 हजार टूटा सोना
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों में जबरदस्त उथल-पुथल मचा दी है। लेकिन इस बार सबसे बड़ा झटका सराफा बाजार को लगा है, जहां आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
पिछले 25 दिनों के भीतर सोने के दाम अपने रिकॉर्ड हाई स्तर 1,93,096 प्रति 10 ग्राम से गिरकर करीब 1,38,743 तक आ गए हैं, यानी निवेशकों को करीब 54 हजार तक की गिरावट देखने को मिली है। इसी तरह चांदी की कीमतों में और भी तेज गिरावट आई है, जहां यह अपने उच्चतम स्तर 4,20,048 प्रति किलोग्राम से गिरकर लगभग आधी रह गई है। इस अप्रत्याशित गिरावट ने बाजार में निवेश करने वालों को हैरान कर दिया है, क्योंकि युद्ध जैसे हालात में आमतौर पर इन धातुओं की मांग बढ़ती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार तस्वीर उलट गई है। वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट के चलते बड़े निवेशकों को नकदी की जरूरत पड़ी, जिसके चलते उन्होंने सोना और चांदी बेचकर कैश जुटाया। इसके साथ ही डॉलर की मजबूती और बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने भी इन धातुओं की मांग को कमजोर कर दिया, जिससे कीमतों पर लगातार दबाव बना रहा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह खरीदारी का सही समय है। बाजार जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अवसर हो सकता है, लेकिन फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना ज्यादा सुरक्षित रणनीति मानी जा रही है।
जब तक वैश्विक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, अगर युद्ध और गहराता है या सप्लाई चेन पर असर पड़ता है, तो कीमतों में दोबारा तेजी भी देखने को मिल सकती है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
