माइक्रो स्ट्रेस क्या है? रोज़मर्रा की छोटी टेंशन कैसे बिगाड़ रही सेहत

माइक्रो स्ट्रेस क्या है? रोज़मर्रा की छोटी टेंशन कैसे बिगाड़ रही सेहत

माइक्रो स्ट्रेस यानी रोज़मर्रा की छोटी-छोटी चिंताएं, जो देखने में मामूली लगती हैं, लेकिन मन और शरीर पर लगातार दबाव बनाती रहती हैं. जैसे सुबह देर हो जाना, काम की डेडलाइन, फोन नोटिफिकेशन की भरमार, घर और ऑफिस की जिम्मेदारियां या किसी की छोटी-सी नाराज़गी. ये बड़ी समस्या नहीं होतीं, लेकिन बार-बार होने के कारण मानसिक तनाव बढ़ाती हैं. माइक्रो स्ट्रेस अक्सर तब होता है जब व्यक्ति पर उम्मीदों का दबाव ज्यादा हो, समय कम हो और खुद के लिए वक्त न बचे.

कई बार लोग माइक्रो स्ट्रेस गंभीर नहीं मानते, क्योंकि यह अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता है. इसके कारण चिड़चिड़ापन, बेचैनी, ध्यान भटकना, छोटी बात पर गुस्सा आना, नींद में कमी और हर समय व्यस्त महसूस करना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. व्यक्ति को लगता है कि वह लगातार भागदौड़ में है, लेकिन स्पष्ट कारण समझ नहीं आता. इसलिए जानना जरूरी है कि माइक्रो स्ट्रेस से सेहत पर क्या असर होता है और इससे बचाव कैसे करें.

माइक्रो स्ट्रेस से सेहत पर क्या असर होता है?
डॉ. बताते हैं कि लगातार बना रहने वाला माइक्रो स्ट्रेस शरीर के तनाव हॉर्मोन को बढ़ा देता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल पर अधिक दबाव पड़ता है. लंबे समय तक ऐसा रहने पर इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे बार-बार सर्दी-जुकाम या संक्रमण की समस्या हो सकती है. माइक्रो स्ट्रेस पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है, जिससे गैस, एसिडिटी और पेट दर्द जैसी परेशानियां बढ़ती हैं. मानसिक रूप से व्यक्ति थकान, उदासी और मोटिवेशन की कमी महसूस कर सकता है. नींद पूरी न होने से दिनभर सुस्ती रहती है और काम की क्षमता घटती है. धीरे-धीरे यह स्थिति चिंता और डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है. इसलिए छोटी-छोटी टेंशन को नजरअंदाज करना सही नहीं है.

Read More Water Intake: दिनभर हाइड्रेट रहने के लिए कितना पानी पिएं? जानें उम्र, मौसम और एक्टिविटी के हिसाब से सही तरीका

किसको है ज्यादा खतरा?
जो लोग मल्टीटास्किंग करते हैं, जैसे कामकाजी महिलाएं, स्टूडेंट्स या ऑफिस में लगातार टारगेट पूरा करने वाले कर्मचारी, उन्हें माइक्रो स्ट्रेस का खतरा ज्यादा होता है. जो लोग हर काम में परफेक्शन चाहते हैं या दूसरों की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव महसूस करते हैं, वे भी इसकी चपेट में जल्दी आते हैं. डिजिटल गैजेट्स का ज्यादा उपयोग और सोशल मीडिया की तुलना की आदत भी तनाव बढ़ाती है. जिन लोगों को आराम और खुद के लिए समय कम मिलता है, उनमें यह समस्या तेजी से बढ़ सकती है.

Read More Waterproof Mascara और Eyelash Extensions: खूबसूरती के साथ आंखों की सेहत से न करें समझौता, जानें क्या हैं नुकसान

कैसे करें बचाव?

  • रोज़ 7-8 घंटे की नींद लें.
  • दिनभर में छोटे-छोटे ब्रेक जरूर लें.
  • मोबाइल नोटिफिकेशन सीमित रखें.
  • समय प्रबंधन की आदत डालें.
  • रोज़ हल्का व्यायाम या योग करें.
  • अपनी प्राथमिकताएं तय करें.
  • परिवार और दोस्तों से खुलकर बात करें.
Error on ReusableComponentWidget
Tags:

Latest News

बेमेतरा में प्रमोशन का बड़ा खेल पुरानी एसीआर की ग्रेडिंग बदलकर अफसर को मिला उच्च पद बेमेतरा में प्रमोशन का बड़ा खेल पुरानी एसीआर की ग्रेडिंग बदलकर अफसर को मिला उच्च पद
मोपका में सूने मकान का ताला तोड़कर चोरी, एक आरोपी गिरफ्तार
रात्रि गश्त में चाकूबाज गिरफ्तार, बटनदार चाकू जब्त, आरोपी पर कई थानों में दर्ज हैं आपराधिक मामले
शराब के नशे में पड़ोसी के घर घुसकर मारपीट, निगरानी बदमाश और पत्नी गिरफ्तार
साइबर अपराध पर आईजी की सख्ती, साइबर पोर्टल पर रोजाना लॉगिन अनिवार्य, फर्जी सिम बेचने वाले एजेंटों पर FIR के निर्देश
स्थगन आदेश के बावजूद नामांतरण का आरोप! तखतपुर में राजस्व विभाग पर उठे सवाल, SDM बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई
मिड-डे मील की थाली में मिली काली गोलीनुमा चीज, 30 छात्राओं को पेट दर्द; बेमेतरा के स्वामी आत्मानंद स्कूल में हड़कंप
व्यक्तिगत प्रचार के लिए नहीं है जनहित याचिका , कथित पत्रकार की पीआईएल हाईकोर्ट से ख़ारिज
10 दिन पहले खरीदी ई-स्कूटी बनी आफत! तड़के धमाके के साथ घर में लगी आग, मां-बेटी 60% झुलसीं; सामान जलकर खाक
‘जिसे खोज रहा था, उसी की हत्या का आरोपी निकला!’ CCTV से खुला राज, पुणे में 9 साल की मासूम के केस में पड़ोसी गिरफ्तार
जम्मू-कश्मीर में बारिश बनी आफत! हाईवे पर पहाड़ का मलबा, सैकड़ों वाहन फंसे; बच्चों को कंधे पर लेकर स्कूल पहुंच रहे अभिभावक
बिलासपुर में मूर्ति निर्माण पर सख्ती, पीओपी और रासायनिक रंगों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध