Navratri 2026: व्रत में भी बढ़ सकती है ब्लड शुगर, डायबिटीज मरीज इन चीजों से रहें सावधान
Diabetes During Navratri Fast: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होने जा रही है। इस दौरान कई लोग नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। धार्मिक आस्था के साथ कुछ लोग इसे खान-पान में बदलाव और शरीर को हल्का रखने से भी जोड़ते हैं। लेकिन अगर आपको डायबिटीज है तो व्रत के दौरान खान-पान और दवाओं को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
कई लोगों को लगता है कि व्रत में खाई जाने वाली हर चीज हेल्दी होती है और इससे ब्लड शुगर नहीं बढ़ती। ऐसा जरूरी नहीं है। साबूदाना, आलू, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीजों में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा हो सकती है। इनका ज्यादा सेवन ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित कर सकता है।
क्या व्रत का खाना ब्लड शुगर नहीं बढ़ाता?
यह मानना सही नहीं है कि व्रत में इस्तेमाल होने वाली सभी चीजें डायबिटीज के लिए सुरक्षित हैं। साबूदाना और आलू जैसे खाद्य पदार्थ कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं, जबकि कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजों की मात्रा और उन्हें पकाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है।
साबूदाने की खिचड़ी, आलू की ज्यादा मात्रा, कुट्टू की तली हुई पूरी या पकौड़े जैसी चीजें ज्यादा खाने पर ब्लड शुगर बढ़ा सकती हैं। इसलिए डायबिटीज मरीजों के लिए सिर्फ खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि पोर्टियन साइज और खाना पकाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है।
लंबे समय तक भूखे रहने से शुगर कम भी हो सकती है
डायबिटीज में समस्या सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की नहीं है। लंबे समय तक खाना नहीं खाने पर कुछ मरीजों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा भी रहता है। यह जोखिम खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा हो सकता है जो इंसुलिन या ऐसी दवाएं लेते हैं, जिनसे ब्लड शुगर कम हो सकता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार कई घंटे भूखे रहना सभी डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
अगर डॉक्टर ने व्रत रखने की अनुमति दी है, तो खाने की मात्रा और समय को लेकर पहले से योजना बनाना बेहतर है।
- साबूदाना और आलू जैसे हाई-कार्ब फूड की मात्रा सीमित रखें।
- तली हुई पूरी, पकौड़े और ज्यादा घी-तेल वाले व्रत के भोजन से बचें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार फल, बिना चीनी वाला दही या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल किए जा सकते हैं।
- पर्याप्त पानी पीते रहें, खासकर गर्म मौसम या लंबे समय तक उपवास में।
- ब्लड ग्लूकोज की नियमित जांच करते रहें।
- व्रत के कारण दवा का समय या डोज खुद से न बदलें।
डायबिटीज में किन लोगों को व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
हर डायबिटीज मरीज की स्थिति एक जैसी नहीं होती। टाइप-1 डायबिटीज, इंसुलिन लेने वाले मरीज, बार-बार हाइपोग्लाइसीमिया होने वाले लोग और किडनी या हृदय संबंधी बीमारी वाले मरीजों को लंबे समय तक उपवास रखने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों का ब्लड शुगर पहले से नियंत्रित नहीं है, उनके लिए भी बिना मेडिकल सलाह के कई घंटों तक भोजन छोड़ना जोखिम बढ़ा सकता है।
शुगर कम होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण
व्रत के दौरान अगर ब्लड शुगर बहुत कम हो जाए तो कमजोरी, पसीना आना, हाथ कांपना, चक्कर, तेज भूख, घबराहट, धड़कन बढ़ना और कंफ्यूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर मरीज बेहोशी, गंभीर भ्रम या ऐसी स्थिति में पहुंच जाए जहां वह खुद कुछ खा-पी न सके, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
दवाओं में खुद से न करें बदलाव
व्रत के दौरान खाना कम होने पर कुछ डायबिटीज की दवाओं और इंसुलिन का असर ब्लड शुगर को जरूरत से ज्यादा कम कर सकता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से चर्चा करके दवा, इंसुलिन, भोजन और ग्लूकोज मॉनिटरिंग का प्लान तय करना बेहतर है। नवरात्रि में व्रत रखना धार्मिक आस्था का हिस्सा हो सकता है, लेकिन डायबिटीज मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। व्रत में क्या खाना है और कितनी देर तक उपवास रखना है, इसका फैसला अपनी मेडिकल स्थिति के अनुसार करें।
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। डायबिटीज मरीज अपनी दवा या इंसुलिन की मात्रा/समय में बदलाव खुद से न करें। लंबे उपवास से पहले अपने डॉक्टर या डायबिटीज विशेषज्ञ से सलाह लें। गंभीर लो ब्लड शुगर के लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
