ब्लड शुगर हाई रहता है तो डाइट में शामिल करें ये फूड्स! एक्सपर्ट ने बताए हेल्दी ड्रिंक्स, प्रोटीन और गुड फैट्स के विकल्प
डायबिटीज में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए नियमित दवाओं और डॉक्टर की सलाह के साथ खानपान और रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना भी अहम भूमिका निभाता है। सही डाइट चुनने से ब्लड ग्लूकोज को मैनेज करने में मदद मिल सकती है। लेकिन सवाल है कि शुगर बढ़ने की समस्या होने पर क्या खाना चाहिए और किन ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है?
डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर इंसुलिन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाता या उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहने पर दिल, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी हैं।
ब्लड शुगर मैनेज करने के लिए कौन-सी ड्रिंक्स हैं बेहतर?
इनमें सादा पानी, ग्रीन टी, माचा, ब्लैक कॉफी और बिना चीनी वाला स्पार्कलिंग वॉटर शामिल हैं। बिना चीनी वाला स्पार्कलिंग वॉटर उन लोगों के लिए विकल्प हो सकता है, जिन्हें सामान्य पानी के अलावा कुछ अलग पीना पसंद है। इसमें आमतौर पर चीनी और कैलोरी नहीं होती।
हालांकि, उत्पाद खरीदते समय उसका लेबल जरूर पढ़ें, क्योंकि फ्लेवर्ड ड्रिंक्स में अतिरिक्त शुगर या स्वीटनर हो सकते हैं। ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी भी बिना चीनी के ली जा सकती हैं। कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों को इनका सेवन सीमित रखना चाहिए। वहीं, ब्लड शुगर मैनेज करने के लिए सादा पानी सबसे आसान विकल्पों में से एक है। मीठे सोडा, पैकेज्ड जूस और शुगर वाली चाय-कॉफी का सेवन कम करना फायदेमंद हो सकता है।
प्रोटीन के लिए डाइट में शामिल करें ये फूड्स
संतुलित डाइट में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होना जरूरी है। यह मांसपेशियों को स्वस्थ रखने और भोजन के बाद पेट भरा महसूस करने में मदद करता है। प्रोटीन के कुछ अच्छे विकल्प हैं:
- अंडे: उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का स्रोत।
- ग्रीक योगर्ट: प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी मिलता है। बिना अतिरिक्त चीनी वाला विकल्प चुनें।
- सैल्मन जैसी मछली: प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड का स्रोत।
- दालें: प्रोटीन और फाइबर दोनों प्रदान करती हैं।
- एडामे बीन्स: सोयाबीन की कोमल फलियां, जिनमें प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है।
शाकाहारी लोग दाल, चना, राजमा, सोया और बिना चीनी वाले दही जैसे विकल्पों से भी प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं।
कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं
ब्लड शुगर बढ़ने पर कई लोग कार्बोहाइड्रेट खाना पूरी तरह छोड़ देते हैं, जबकि ऐसा करना हर किसी के लिए जरूरी या उचित नहीं है। कार्बोहाइड्रेट का प्रकार, उसकी मात्रा और उसे दूसरे खाद्य पदार्थों के साथ खाने का तरीका ब्लड शुगर पर असर डालता है। ओट्स, जौ, बीन्स, राजमा, चना, साबुत अनाज और शकरकंद जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं।
इनमें से कई फाइबर से भरपूर होते हैं, जो पाचन को धीमा करने और भोजन के बाद ब्लड शुगर में होने वाली तेजी को कम करने में मदद कर सकता है। बेरीज जैसे फल भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। फल खाने पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय उनकी मात्रा और व्यक्तिगत ब्लड शुगर प्रतिक्रिया का ध्यान रखना बेहतर है। मैदा, मीठे सीरियल, मिठाइयों और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
हेल्दी फैट्स के लिए खाएं अखरोट, चिया सीड्स और अलसी
डाइट में सही मात्रा में हेल्दी फैट्स शामिल करना भी महत्वपूर्ण है। ये शरीर को ऊर्जा देने और कुछ जरूरी पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करते हैं। इसके लिए निम्न विकल्प उपयोगी हो सकते हैं:
- एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल: खाना बनाने या सलाद में सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- अखरोट: इसमें असंतृप्त वसा और अन्य पोषक तत्व होते हैं।
- चिया सीड्स: फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड का स्रोत।
- पिसी हुई अलसी: फाइबर और अल्फा-लिनोलेनिक एसिड प्रदान करती है।
- एवोकाडो: इसमें मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है।
ध्यान रखें कि हेल्दी फैट्स में भी कैलोरी होती है, इसलिए इनका सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए।
डायबिटीज में डाइट के साथ इन बातों का भी रखें ध्यान
ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए केवल किसी एक फूड या ड्रिंक पर निर्भर रहना सही नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन और समय-समय पर ग्लूकोज की जांच भी जरूरी है।
हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है। उम्र, वजन, डायबिटीज के प्रकार, दवाओं और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार डाइट में बदलाव किया जाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें और न ही उनकी खुराक बदलें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटीशियन से व्यक्तिगत डाइट प्लान बनवाएं।
