सहकारी बैंकों में 60% स्टाफ खत्म: 1000 से घटकर 400 पर सिमटे कर्मचारी, 70 ब्रांचों में 2-3 लोगों के भरोसे कामकाज; अनुकंपा नियुक्ति की 35 फाइलें सालों से दबीं
बैंकिंग संकट: नवंबर में धान खरीदी से बढ़ेगा दबाव, अभी लोन पास होने में ही लग रहे 10 दिन
रायपुर। प्रदेश के सहकारी बैंकों में नई भर्ती और अनुकंपा नियुक्तियां रुकने से पूरा बैंकिंग सिस्टम गड़बड़ा गया है। बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, एक समय जिन सहकारी बैंकों में करीब 1,000 अधिकारी और कर्मचारी काम करते थे, वहां अब स्टाफ घटकर सिर्फ 400 रह गया है। बैंक की कुल 70 ब्रांचों में नियम के हिसाब से कम से कम 7-7 कर्मचारी तैनात होने चाहिए, लेकिन अभी ज्यादातर ब्रांच सिर्फ 2 से 3 कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं। दूसरी तरफ, मृतक कर्मचारियों के परिवारों की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी 35 फाइलें पिछले कई सालों से अफसरों की टेबल पर अटकी हुई हैं। स्टाफ की इस भारी कमी से जहां कर्मचारियों पर वर्कलोड तीन गुना बढ़ गया है, वहीं नवंबर में शुरू होने वाली धान खरीदी से पहले किसानों और आम खाताधारकों के रोजमर्रा के काम ठप पड़ने लगे हैं।
लोन पास होने में 10 दिन की देरी, एक दिन का काम दो दिन में
ब्रांचों में स्टाफ कम होने का सीधा असर आम लोगों को मिलने वाली जरूरी सेवाओं पर पड़ रहा है। काउंटर पर भीड़ बढ़ने से नकद जमा करने और निकालने, पासबुक अपडेट कराने, चेक भुगतान और खाते की जानकारी लेने के लिए ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। केवायसी (KYC), एटीएम कार्ड बांटने और बीमा से जुड़े जो काम एक दिन में पूरे हो जाने चाहिए, उनमें 1 से 2 दिन या उससे ज्यादा वक्त लग रहा है। सबसे खराब हालत लोन बांटने की है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और कृषि ऋण की जो फाइल पहले 2 से 3 दिन में क्लियर हो जाती थी, उसे पूरा होने में अब एक से डेढ़ सप्ताह (7 से 10 दिन) तक लग रहे हैं।
नवंबर में धान खरीदी, किसानों के भुगतान और वसूली पर पड़ेगा असर
5 और 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के दौरान सहकारी समितियों और बैंक की 70 ब्रांचों के बीच सीधा तालमेल सबसे जरूरी होगा। खरीफ सीजन के इस सबसे बड़े काम में किसानों के बैंक खातों में समय पर पैसा जमा होने, पुराने कर्ज की वसूली करने और रोजाना के लेनदेन का पूरा भार इन्हीं 400 कर्मचारियों पर रहेगा। एक ब्रांच में सिर्फ 2 या 3 कर्मचारी होने से धान खरीदी के वक्त भुगतान से जुड़ी शिकायतों को सुलझाने और किसानों को समय पर बैंकिंग सुविधा देने में बड़ी रुकावट आने की आशंका है।
35 परिवार सालों से काट रहे चक्कर
सहकारी बैंक में अनुकंपा नियुक्ति के 35 मामले कई सालों से पेंडिंग हैं। हितग्राही अपने हक के लिए लगातार अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी फाइलों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
70 ब्रांचों में मानक से आधे कर्मचारी भी नहीं
नियम के मुताबिक एक ब्रांच चलाने के लिए कम से कम 7 कर्मचारी जरूरी हैं। इस हिसाब से 70 ब्रांचों में ही 490 कर्मचारी होने चाहिए, जबकि पूरे बैंक में कुल 400 लोग बचे हैं। कई साल से नई भर्ती पूरी तरह बंद है।
बिना अतिरिक्त स्टाफ के खरीफ सीजन का बोझ:
धान खरीदी में समितियों से लेकर किसानों के खातों में रकम भेजने तक का काम इसी बैंक के जिम्मे है। स्टाफ की कमी के बावजूद प्रबंधन ने अब तक कोई दूसरा इंतजाम नहीं किया है।
कर्मचारी संगठनों ने खोला मोर्चा, भर्ती शुरू करने की मांग
लगातार घटते स्टाफ और बढ़ते काम के बोझ को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। संगठन के लोग कई साल से बंद पड़ी नई भर्तियों को तुरंत खोलने और अटकी हुई 35 अनुकंपा नियुक्तियों को क्लियर करने की मांग को लेकर प्रबंधन पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
