इंटरमिटेंट फास्टिंग से कितना घटता है वजन? नई स्टडी में बड़ा खुलासा

आजकल वजन घटाने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन बहुत बढ़ गया है. इसको कुछ लोग वजन घटाने का चमत्कारी तरीका भी मानते हैं, लेकिन अब एक बड़ी स्टडी ने फ़ास्टिंग के इस तरीक़े को बहुत फायदेमंद नहीं बताया है. रिसर्च में पाया गया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से उतना ही वजन घटता है, जितना नार्मल डाइट प्लान से आप अपना वजन घटा सकते हैं. ये रिसर्च Cochrane द्वारा की गई, जिसमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका के कुल 1,995 वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग डाइट पैटर्न की तुलना करने के बाद यह कंक्लूज़न निकाला गया कि वजन घटाने में अंतर बहुत ज्यादा नहीं था. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी डाइट का असर व्यक्ति की लाइफस्टाइल, शारीरिक एक्टिविटी और नियमितता पर भी निर्भर करता है. केवल खाने का समय बदल देने से बड़े परिणाम मिलना जरूरी नहीं है. इसलिए वजन घटाने के लिए ऐसा तरीका अपनाना बेहतर है, जिसे लंबे समय तक आसानी से फॉलो किया जा सके और जिसमें संतुलित खानपान व नियमित दिनचर्या शामिल हो.

औसतन सिर्फ 3% वजन कम
वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाने वालों का औसतन करीब 3% वजन कम हुआ. यह विश्लेषण अलग-अलग देशों में की गई कई रिसर्च स्टडीज़ के डेटा को मिलाकर किया गया था.

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डॉक्टरों के मुताबिक, सेहत पर स्पष्ट सकारात्मक असर के लिए कम से कम 5% वजन कम होना जरूरी माना जाता है, जिससे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा घट सकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई चमत्कारी उपाय नहीं है और यह पारंपरिक डाइट जितनी ही प्रभावी है, उससे बेहतर नहीं.

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अलग-अलग फास्टिंग तरीकों का असर
अध्ययन में कई तरह की पद्धतियों को शामिल किया गया, जैसे हर दूसरे दिन उपवास, 5:2 डाइट (हफ्ते में दो दिन कम खाना) और टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग (दिन के तय घंटों में ही भोजन). नतीजे बताते हैं कि इनमें से कोई भी तरीका सामान्य डाइट प्लान से ज्यादा फायदा नहीं देता.

रिसर्च की सीमाएं भी सामने आईं
ज्यादातर अध्ययन 12 महीने से कम अवधि के थे और उनकी गुणवत्ता मध्यम स्तर की थी. हैरानी की बात यह रही कि प्रतिभागियों से यह नहीं पूछा गया कि वे इस डाइट से कितने संतुष्ट थे या इसे लंबे समय तक अपनाना कितना आसान था.

क्या अन्य फायदे संभव हैं?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि फास्टिंग का असर शरीर की जैविक घड़ी पर पड़ सकता है. पशु अध्ययनों में इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होने और सूजन कम होने के संकेत मिले हैं. हालांकि, इंसानों में इन फायदों को लेकर अभी ठोस प्रमाण नहीं हैं.

विशेषज्ञ की राय
डॉ. बताते हैं कि वजन घटाने में शारीरिक एक्टिविटी, संतुलित डाइट और नियमित दिनचर्या की अहम भूमिका होती है. केवल उपवास पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. इसलिए वजन कम करने के लिए टिकाऊ और संतुलित तरीका अपनाना ही बेहतर माना जाता है.

 

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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