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Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी पर भूल से भी न तोड़ें ये नियम, वरना बिगड़ सकते हैं काम!
Varuthini Ekadashi Rules: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है और इनमें भी वरुथिनी एकादशी को बेहद पुण्यदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है. लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन न किया जाए, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता और जीवन में बाधाएं भी आ सकती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
वरुथिनी एकादशी के दिन भूल से भी न तोड़ें ये नियम
क्रोध और विवाद से रहें दूर
एकादशी के दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना जरूरी होता है. इस दिन किसी से झगड़ा या अपशब्द बोलने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है.
तामसिक भोजन का सेवन न करें
इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार और मदिरा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. घर में जिन सदस्यों ने व्रत नहीं रखा है उन्हें भी इस दिन तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए.
चावल खाने से करें परहेज
एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है. मान्यता है कि इससे व्रत का फल नष्ट हो सकता है.
झूठ बोलने से बचें
मान्यता के अनुसार, इस दिन झूठ बोलना या किसी को धोखा देना बहुत अशुभ माना जाता है.
देर तक सोना न करें
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और पूजा करना शुभ होता है. इसलिए इस दिन देर तक सोने से बचना चाहिए.
तुलसी दल न तोड़ें
भगवान विष्णु को तुलसी बहुत ही प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना अशुभ माना जाता है. इसलिए पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें.
कैसे करें वरुथिनी एकादशी व्रत?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. उन्हें फल, फूल और तुलसी अर्पित करें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें और दिनभर भगवान का स्मरण करें. व्रत के दौरान फलाहार किया जा सकता है और अगले दिन द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक पारण किया जाता है.
क्या मिलता है इस व्रत का फल?
मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं, धन-समृद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में सफलता के नए रास्ते खुलते हैं. यह व्रत न केवल धार्मिक बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन के लिए भी बेहद लाभकारी माना गया है.
वरुथिनी एकादशी का महत्व?
वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को हजारों सालों के तप के बराबर पुण्य मिलता है. मान्यता है कि यह व्रत व्यक्ति के दुर्भाग्य को दूर कर उसे सौभाग्य प्रदान करता है. साथ ही, यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. नेशनल जगत विज़न इसकी पुष्टि नहीं करता है.
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
