यूजीसी के नए नियम को वापस लेने की मांग, सवर्ण समाज संगठन बिलासपुर ने घेरा कलेक्ट्रेट, हनुमान चालीसा पाठ कर सौंपा ज्ञापन 

IMG_20260202_154449  राष्ट्रीय जगत विजन। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सवर्ण समाज संगठन बिलासपुर के सदस्यों ने यूजीसी द्वारा जारी नए नियम को वापस लेने की मांग की है। शांतिपूर्ण विरोध जताते हुए बैठकर हनुमान चालीसा पाठ कर राष्ट्रपति के नाप पर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

        यूजीसी द्वारा 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन के लिए बिल के सन्दर्भ में कई गंभीर चिंताएं ज्ञापन के माध्यम से रखा गया है। जिसमें कई संवैधानिक अधिकारों का हनन होने की बात रखी गई है।IMG_20260202_154428

यूजीसी के नए नियम से समाज में जातिगत को भेदभाव मिलेगा बढ़ावा

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लोगों ने कलेक्टर का घेराव कर अपनी मांग रखते हुए कहा कि यूजीसी द्वारा जारी नए नियम समाज में समता लाने के बजाय समाज में भेदभाव करती हैं। योग्यता रखने वाले विद्यार्थियों की अवसर खत्म करती है।संवैधानिक समानता के विरूद्ध युजीसी द्वारा अधिसूचित नये नियम लागू हुये है जो समानता के संवैधानिक सिध्दांतो के विपरीत है, यह कानून सामान्य वर्ग के छात्रों संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है। भेदभाव की परिभाषा में कमी इन नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को केवल अनुसुचित जाति, अनुसुचित जनजाति और ओबीसी तक सीमित कर दिया है, यह कानून सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव प्रदर्शित करता है अतः उन्हें इस नियम के तहत् संरक्षण प्राप्त नहीं है इसलिये यह कानून अनैतिक है।IMG_20260202_154516

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सामान्य वर्ग के छात्रों को अपना पक्ष रखने से वंचित

जाँच समिति का एकतरफा गठन विनियमों में अनिवार्य इक्वीटी कमिटी में अनुचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था है, जिसमें एक वर्ग विशेष के लोगों को शामिल न करने से सामान्य वर्ग के छात्रों को अपना पक्ष रखने से वंचित किये जाने की व्यवस्था कर दी गयी है।छात्रों में अविश्वास का माहौल- यह काला कानून शैक्षणिक संस्थानों में सौहाद्रपूर्ण वातावरण को बिगाड़कर जातिगत संघर्ष को बढ़ावा दे रहा है।

इस कानून में कई प्रावधान अस्पष्ट है और इनका दुरूपयोग होने की संभावना है। इस अधिनियम का समाज एवं शैक्षणिक परिसर पर विभाजन कारी प्रभाव पड़ने की संभावना है।

क्या रहा उनकी मांगे ?

 युजीसी अधिनियम 2026 को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाये। नियमों की संवैधानिक वैधता और व्यवहारिक दुष्प्रभावों की उच्च स्तरीय समीक्षा की जाये। युजीसी अधिनियम 2012 को नियमित रखा जाने  जैसे अहम मांगे रखी गई।









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