धार सड़क हादसा: एक साथ जलीं 16 चिताएं, गांवों में पसरा मातम

राष्ट्रीय जगत विजन/धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। बुधवार रात इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिकलिया फाटा के पास एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन का टायर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसमें 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि करीब 30 लोग घायल हो गए। मृतकों में 6 बच्चे भी शामिल हैं।
हादसे के बाद गुरुवार सुबह जब सभी मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया, तो दृश्य बेहद मार्मिक था। अलग-अलग गांवों—नयापुरा, सेमलीपुरा और रामपुरा—से आए लोगों की आंखें नम थीं। एक साथ 16 चिताएं जलीं, वहीं चार महिलाओं के शवों को एक ही चिता पर रखा गया। इस हृदयविदारक दृश्य ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया।
ओवर स्पीड बनी हादसे की वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिकअप वाहन में करीब 46 मजदूर सवार थे और वाहन की रफ्तार लगभग 100 किमी प्रति घंटा थी। अचानक टायर फटने से वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गया और 3-4 बार पलटने के बाद रॉन्ग साइड में जाकर एक स्कॉर्पियो से टकरा गया।
घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इंदौर ग्रामीण के डीआईजी मनोज कुमार सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण कर बताया कि प्रारंभिक जांच में ओवरस्पीडिंग हादसे की मुख्य वजह सामने आई है। साथ ही सड़क निर्माण और सुरक्षा मानकों में लापरवाही भी उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनास्थल पर न तो कोई चेतावनी संकेत (साइन बोर्ड) था और न ही स्टॉप सिग्नल, जिससे दुर्घटना की संभावना और बढ़ गई।
इधर, विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी और अवैध परिवहन को इस तरह की घटनाओं की बड़ी वजह बताया। उनका कहना है कि मजदूरों को ओवरलोड पिकअप वाहनों में भरकर ले जाना आम बात हो गई है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा, ओवरलोडिंग और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे दोहराए जाने की आशंका बनी रहेगी।
