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Tiger Poaching Case: 3 साल के युवा बाघ की दर्दनाक मौत, सिस्टम पर उठे सवाल, वन अधिकारी निकला शिकारी गिरोह का सदस्य, 9 आरोपी गिरफ्तार
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से सामने आई यह घटना सिर्फ शिकार नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल है। Indravati National Park और बीजापुर के जंगलों में बाघ और तेंदुए की मौत ने पूरे वन विभाग को हिला दिया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले में वन विभाग का ही एक अधिकारी, डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद कोयाम, शिकारी गिरोह का हिस्सा निकला। जिस पर जंगल और वन्यजीवों की रक्षा की जिम्मेदारी थी, वही इस काले खेल में शामिल पाया गया। वन विभाग की उड़नदस्ता टीम की कार्रवाई में कुल 9 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। ये सभी बाघ और तेंदुए की खाल को बाइक के जरिए रायपुर ले जाकर बेचने की तैयारी में थे।
क्रूर तरीके से किया गया शिकार
विशेषज्ञों के मुताबिक शिकारियों ने बेहद खतरनाक और अमानवीय तरीका अपनाया। मांस का लालच देकर जानवरों को फंसाया गया और फिर तार के फंदे (snare trap) से गला कस दिया गया। बाघ और तेंदुए दोनों 2-3 दिनों तक तड़पते रहे और आखिरकार दम तोड़ दिया। मारे गए बाघ की उम्र करीब 3 साल बताई जा रही है।
सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला अब सिर्फ वन्यजीव शिकार का नहीं रह गया है, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। जब सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले ही शिकारियों के साथ मिल जाएं, तो जंगल और वन्यजीवों की रक्षा कैसे संभव होगी?
खामोश जंगल, गूंजते सवाल
- बस्तर के जंगल आज खामोश हैं, लेकिन यह घटना कई सवाल छोड़ गई है-
- क्या जंगल अब भी सुरक्षित हैं?
- या शिकार का नेटवर्क सिस्टम के अंदर तक फैल चुका है?
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
