सक्ती राजपरिवार में सुप्रीम कोर्ट की दखल, कथित यौन उत्पीड़न मामले में हाई कोर्ट के फैसले पर राज्य और आरोपी को नोटिस
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के चर्चित सक्ती राजपरिवार से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न और अनाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है । बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा आरोपी धर्मेंद्र सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिदार को सभी आरोपों से बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली पीड़िता की विशेष अनुमति याचिका (एसपीएल) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शासन और आरोपी को नोटिस जारी किया है । शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है ।
क्या है पूरा मामला ?
मामला 9 जनवरी 2022 का है। पीड़िता के अनुसार, घटना के समय वह अपने घर में अकेली थी। इसी दौरान सक्ती के पीला महल निवासी धर्मेंद्र सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिदार, जिनका सक्ती के पूर्व राजपरिवार के 'युवराज' के रूप में राज्याभिषेक हुआ था, कथित रूप से पीछे के रास्ते से घर में घुस आए।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने पीड़िता का गला दबाया, उसके साथ जबरदस्ती की, कपड़े फाड़ दिए और गंभीर यौन उत्पीड़न का प्रयास किया । घटना के बाद सक्ती थाने में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने जांच शुरू की ।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई थी सजा
मामले की सुनवाई सक्ती के फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। 21 मई 2025 को अदालत ने आरोपी धर्मेंद्र सिंह को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(1) के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई थी। वहीं, धारा 450 के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 5,000 के जुर्माने से भी दंडित किया गया था।
हाई कोर्ट ने आरोपी को किया था बरी
फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता ने सजा बढ़ाने की मांग करते हुए और आरोपी ने दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए बिलासपुर हाई कोर्ट में अपील दायर की थी । मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने की । 20 नवंबर 2025 को सुनाए गए फैसले में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पलटते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया ।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास और बाद में किए गए सुधार पाए गए । अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और दोनों पक्षों के बीच पारिवारिक संपत्ति एवं उत्तराधिकार विवाद से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया । इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया था ।
सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा मामला
बिलासपुर हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसपीएल) दाखिल की । शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए याचिका दाखिल करने में हुई देरी को माफ कर दिया और मामले की सुनवाई स्वीकार कर ली ।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शासन और आरोपी धर्मेंद्र सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिदार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है ।
अब इस बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं । अदालत के समक्ष राज्य सरकार और आरोपी का जवाब आने के बाद यह तय होगा कि हाई कोर्ट के फैसले पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होगी।
