अरपा भैंसाझार बैराज: फ्लड प्रोटेक्शन वाल बहने का मामला,ईई सिद्दीकी को बचाने लीपापोती, ठेकेदार के पत्र से खुला तकनीकी खामी का राज
बिलासपुर । जिले के कोटा स्थित अरपा भैंसाझार बैराज के समीप फ्लड प्रोटेक्शन वाल बहने के मामले में जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में है। कार्यपालन अभियंता (ईई) एस. सिद्दीकी को बचाने के लिए विभागीय कार्यालय में जमकर लीपापोती की जा रही है। विभाग इस मामले को बारिश का असर बताकर रफा-दफा करने की जुगत में है, लेकिन काम करने वाले ठेकेदार के पत्र और मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन ने इस पूरे खेल से पर्दा उठा दिया है। पूरी रिपोर्ट और साक्ष्य देखने पर यह बात सामने आती है कि निर्माण बहने की मुख्य वजह तकनीकी खराबी और गलत डिजाइन थी, जिसे ईई के निर्देशन में बनवाया गया था।
ठेकेदार के जवाब से खुल गई विभाग की पोल....
जल संसाधन संभाग कोटा के कार्यपालन अभियंता के पत्र का जवाब देते हुए ठेकेदार ने विभाग की तकनीकी खामियों को बिंदुवार उजागर किया है। ठेकेदार ने अपने पत्र में लिखा है कि:
- दायां फ्लैंक प्रतिवर्ष क्षतिग्रस्त हो रहा है, जबकि बायां फ्लैंक 7 साल बाद भी सही स्थिति में है।
- तकनीकी चूक के कारण दाहिने स्लोप का पी.सी.सी. ब्लॉक (20 सेमी. मोटाई) स्काउरिंग स्लूस के ठीक सामने बना दिया गया।
- स्लूस के डाउन स्ट्रीम में पानी के अनियंत्रित वेग (Turbulence) को रोकने के लिए डिजाइन में कोई इंतजाम नहीं था।
- डाउन स्ट्रीम के स्लोप की डिजाइन भी तकनीकी रूप से गलत थी।
ठेकेदार के पत्र में उल्लेख है कि इस तरह की तकनीकी गलतियों के कारण हो रहे नुकसान के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह अनुबंध की कंडिका के तहत सामान्य रखरखाव (General Maintenance) के दायरे में नहीं आता। ठेकेदार ने पी.सी.सी. ब्लॉक की जगह पर्याप्त ऊंचाई की प्रोटेक्शन वॉल या टो-वॉल बनाने का सुझाव भी दिया था, जिसे अनदेखा किया गया।
मुख्य अभियंता के निरीक्षण में पकड़ी गई गड़बड़ी
हसदेव कछार जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता जे.के. नेताम ने 22 अप्रैल 2026 को अरपा भैंसाझार परियोजना का निरीक्षण किया। उनकी रिपोर्ट भी ईई एस. सिद्दीकी के काम पर उंगली उठाती है।
निरीक्षण प्रतिवेदन में बताई गई कमियां इस प्रकार हैं:
- जुलाई 2025 की बाढ़ में 112 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी बैंक प्रोटेक्शन वाल क्षतिग्रस्त हुई।
- प्रोटेक्शन कार्य स्कावरिंग गेट के बहाव क्षेत्र (Water Way) में बना दिया गया था, जिससे नदी के तेज बहाव के कारण वह टूट गया।
- पी.सी.सी. ब्लॉक के नीचे फिल्टर का कोई प्रावधान ही नहीं किया गया था। मिट्टी बहने से ब्लॉक का सेटलमेंट हुआ।
- होइस्ट ब्रिज, गेट फ्रेम और गेट में कई जगहों पर जंग लगा पाया गया।
- बायीं तट पर बने एफ्लक्स बंड के अपस्ट्रीम में स्टोन पिचिंग और डाउन स्ट्रीम में बोल्डर टो का निर्माण नहीं हुआ है।
मुख्य अभियंता ने भी माना कि इसी जगह मरम्मत करने पर निर्माण दोबारा टूटेगा, इसलिए वाटर-वे के बाहर रिटेनिंग वाल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
ईई पर मेहरबानी का कारण अज्ञात
मुख्य अभियंता की रिपोर्ट और ठेकेदार द्वारा प्रेषित जवाब से यह बात पुख्ता होती है कि फ्लड प्रोटेक्शन वाल के निर्माण में ईई एस. सिद्दीकी ने तकनीकी मापदंडों की अनदेखी की। बिना फिल्टर के पीसीसी ब्लॉक लगवाना और स्काउरिंग गेट के वाटर-वे में निर्माण करवाना तकनीकी भूल है। इसके बावजूद विभागीय जांच में इन तकनीकी पहलुओं को किनारे रखकर सारा दोष ठेकेदार और बारिश पर मढ़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि ईई सिद्दीकी की गलतियों पर पर्दा डाला जा सके।
