सीयू में वेतन घोटाला: साढ़े 18 हजार पर दस्तखत कराकर बैंक खातों में डाले सिर्फ 13 हजार, 180 से अधिक गार्डों ने खोला मोर्चा

सीयू में वेतन घोटाला: साढ़े 18 हजार पर दस्तखत कराकर बैंक खातों में डाले सिर्फ 13 हजार, 180 से अधिक गार्डों ने खोला मोर्चा

 केंद्रीय गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही निजी एजेंसी पर लगे बेहद गंभीर आरोप।

 

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 श्रम आयुक्त कार्यालय पहुंची लिखित शिकायत; वेतन संहिता-2019 और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम की धज्जियां उड़ाने का दावा।

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बिलासपुर। केंद्रीय गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (सीयू) में सुरक्षा कर्मियों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय की सुरक्षा का पूरा जिम्मा संभाल रही प्राइवेट एजेंसी 'ईगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड' पर सुरक्षा गार्डों के वेतन भुगतान में भारी अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं।

इस पूरे मामले की शिकायत अब क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय तक पहुंच चुकी है। पीड़ित सुरक्षा गार्डों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत के बाद से ही विश्वविद्यालय परिसर से लेकर सुरक्षा कंपनी के अधिकारियों के बीच भारी हड़कंप मचा हुआ है।

कागजों पर खेल: दस्तखत पूरे पर खाते में 5593 रुपए कम

 

पीड़ित सुरक्षा गार्डों ने बताया है कि कंपनी उन्हें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी देने का बात कहती है। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से हर महीने 18 हजार 593 रुपए वेतन प्राप्ति के बकायदा दस्तावेजों और रजिस्टरों पर हस्ताक्षर करवाए जाते हैं।

लेकिन जब वेतन बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता तो खातों में मात्र 13 हजार रुपए ही जमा किए जा रहे हैं। यानी कागजी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच सीधे तौर पर करीब 5,593 रुपए का बड़ा अंतर है, जिसे डकारने का सीधा आरोप कंपनी पर लगा है।

वर्तमान में विश्वविद्यालय के भीतर इस निजी कंपनी के माध्यम से 180 से अधिक सुरक्षा गार्ड और सुरक्षा अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में तैनात कर्मियों के साथ हो रही इस सुनियोजित हेराफेरी को पीड़ितों ने सीधे तौर पर 'वेतन घोटाला बताया है। 

श्रम कानूनों की उड़ीं धज्जियां, रिकॉर्ड्स खंगालने की मांग

क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय में हुई शिकायत में सुरक्षा गार्डों ने श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन की बात कही है। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कंपनी वेतन संहिता-2019 और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों को पूरी तरह से ठेंगा दिखा रही है।

पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने श्रम आयुक्त से आग्रह किया है कि कंपनी के मुख्य वेतन रजिस्टर, दैनिक उपस्थिति पंजी, बैंक भुगतान के आधिकारिक विवरण और विश्वविद्यालय को भेजे गए बिलों का आपस में बारीकी से मिलान किया जाए। गार्डों का दावा है कि इन दस्तावेजों की सही जांच होते ही सच सामने आ जाएगा।

 

सुपरवाइजर की सफाई: पीएफ और ईएसआईसी कटौती का राग

दूसरी तरफ, इन बेहद गंभीर और तीखे आरोपों पर ईगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड ने अपना बचाव करना शुरू कर दिया है। कंपनी के सुपरवाइजर अखिलेश सिंह ने सुरक्षा गार्डों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है।

सुपरवाइजर अखिलेश सिंह का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन में से जो भी कटौती हो रही है, वह नियमानुसार है। उन्होंने दावा किया कि हर महीने सुरक्षा गार्डों के वेतन से लगभग 3,600 रुपए पीएफ (भविष्य निधि) और 500 रुपए ईएसआईसी (कर्मचारी राज्य बीमा) के रूप में काटे जाते हैं। इसके साथ ही कंपनी के संचालन संबंधी वैधानिक खर्च भी इस राशि में शामिल होते हैं।

सीयू प्रबंधन ने पल्ला झाड़ा: शिकायत आई तो देंगे शो-कॉज

इस बड़े विवाद के सामने आने के बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) प्रबंधन भी हरकत में आता दिख रहा है, हालांकि उन्होंने फिलहाल इस पूरी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। सीयू के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने इस संबंध में विश्वविद्यालय का पक्ष स्पष्ट किया है।

डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन केंद्र सरकार के तय नियमों और एग्रीमेंट के अनुसार सुरक्षा कंपनी को पूरा पेमेंट समय पर जारी करता है। अब वह कंपनी आगे अपने सुरक्षा अधिकारियों और गार्डों को कितना भुगतान कर रही है, इसकी अंदरूनी जानकारी यूनिवर्सिटी के पास नहीं रहती है।

मीडिया प्रभारी ने यह भी बताया कि इस विषय में पहले भी कुछ पूछताछ की गई थी। लेकिन अब चूंकि मामला दोबारा सामने आया है और श्रम आयुक्त तक शिकायत पहुंची है, इसलिए यदि विश्वविद्यालय के पास फिर से कोई औपचारिक शिकायत आती है, तो सुरक्षा एजेंसी को तुरंत शो-कॉज नोटिस जारी कर अनुबंध निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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