बेलगाम अफसरशाही ,सांसद बृजमोहन से आईएएस बोले जो चाहो कर लो स्पीकर तक पहुंचा मामला दिल्ली में भी हलचल...
रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों नौकरशाही का अलग ही रुतबा दिख रहा है। प्रदेश के कद्दावर नेता और रायपुर के भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल और 2004 बैच के आईएएस अमित कटारिया के बीच विवाद की खबरें सुर्खियों में है। आईएएस का मिजाज ऐसा कि वरिष्ठ सांसद के पत्रों का जवाब देना तो दूर उलटे फोन पर धमकी चमकी दे डाली । अब मामला सीधे दिल्ली पहुंच गया है। सांसद ने आई ए एस के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस लगा दिया है।
सरकारी फाइलों में गुम हुए सांसद के पत्र
विवाद की जड़ कोई आम बात नहीं बल्कि जनहित के वे मुद्दे हैं जिन्हें लेकर सांसद बृजमोहन पिछले कई महीनों से स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को पत्र लिख रहे थे। लेकिन लगता है सरकारी फाइलों के बोझ तले साहब को एक सांसद के पत्र पढ़ने की फुर्सत ही नहीं मिली। महीनों तक कोई जवाब नहीं आया। अफसर की इस अनदेखी और सुस्ती से परेशान होकर सांसद ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह से इस आई ए एस की शिकायत कर दी। फिर क्या था जैसे ही
मुख्यमंत्री कार्यालय से अमित कटारिया को निर्देश मिले तो उन्होंने 20 मई को सांसद को फोन घनघनाया। लोकसभा अध्यक्ष को भेजी गई शिकायत के मुताबिक इस बातचीत में आईएएस का मिजाज ऐसा था मानो वे किसी आम फरियादी से बात कर रहे हों। जब सांसद ने पत्रों का जवाब न देने पर सवाल किया तो साहब का पारा चढ़ गया। उन्होंने अपनी प्रशासनिक सीमाओं को पार करते हुए सीधे कह दिया कि जो चाहो कर लो। शायद साहब को लगा कि सिस्टम उनके ही इशारों पर चलता है।
आम जनता के साथ कैसा होता होगा बर्ताव
अपने शिकायती पत्र में बृजमोहन अग्रवाल ने तल्ख लहजे में लिखा है कि जब एक चुने हुए और इतने वरिष्ठ सांसद के साथ कोई अफसर ऐसा बर्ताव कर सकता है तो आम जनता की क्या बिसात। आम आदमी तो अपनी शिकायत लेकर साहब के चेंबर के बाहर ही चक्कर काटता रह जाता होगा। सांसद ने इसे संसदीय प्रोटोकॉल और प्रशासनिक नियमों का खुला उल्लंघन बताया है। एक जनप्रतिनिधि को जवाब न देना सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 105 और केंद्रीय गाइडलाइंस का उल्लंघन है।
केंद्रीय मंत्रालय से तलब हुई रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा सचिवालय ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया है। सचिवालय ने कार्मिक और लोक शिकायत मंत्रालय को पत्र जारी कर तुरंत रिपोर्ट मांगी है। सांसद ने स्पीकर से नियम 227 लागू कर मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंपने और इस बेलगाम अफसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर इस हाई प्रोफाइल विवाद पर आईएएस अमित कटारिया ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।
