ED रेड अपडेट : दुर्ग-बिलासपुर में कारोबारियों पर दबिश, 12 जिले के कलेक्टर घेरे में
रायपुर:छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार तड़के एक बार फिर बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। इस बार ईडी के निशाने पर राज्य के रसूखदार बिल्डर, सर्राफा कारोबारी और दिग्गज राजनेता हैं। केंद्रीय एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने दुर्ग, भिलाई और न्यायधानी बिलासपुर में एक साथ दबिश दी है। यह पूरी कार्रवाई मुख्य रूप से चर्चित 'भारतमाला प्रोजेक्ट' के मुआवजा घोटाले और बहुचर्चित शराब घोटाले के सिंडिकेट से जुड़ी हुई बताई जा रही है। इस घोटाले की आंच अब निचले स्तर के राजस्व कर्मचारियों से होते हुए राज्य के शीर्ष नौकरशाहों तक पहुंच गई है। इस पूरे महाघोटाले में प्रदेश के 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टर ईडी की रडार पर आ गए हैं।
दुर्ग में भाजपा नेता और बिल्डर के ठिकानों पर सघन जांच
दुर्ग जिले में ईडी की टीम ने 'अमर इंफ्रा' के संचालक और जाने-माने बिल्डर चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर धावा बोला है। राठी की पहचान एक भाजपा नेता और पूर्व में टिकट के प्रबल दावेदार के रूप में भी रही है। सुबह से ही उनके निवास और मुख्य कार्यालय दोनों जगहों पर सघन जांच चल रही है। ईडी के अधिकारी उनकी आधा दर्जन से अधिक फर्मों के वित्तीय दस्तावेजों, बेनामी संपत्तियों, निवेश के रिकॉर्ड और बैंक खातों को खंगाल रहे हैं। इसके साथ ही, भिलाई-3 के एफ ब्लॉक विट्ठल पुरम में रहने वाले गोविंद मंडल के घर और फैक्ट्री पर भी ईडी ने डेरा डाल रखा है।
बिलासपुर में शराब सिंडिकेट के करीबियों पर कसा शिकंजा
दूसरी तरफ, बिलासपुर में भी तड़के से ही हड़कंप की स्थिति है। यहां शहर के बड़े सर्राफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के सदर बाजार स्थित 'श्री राम ज्वेलर्स' और उनके निवास पर ईडी के 10 से ज्यादा अधिकारी दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई शराब घोटाले के फरार आरोपी विकास अग्रवाल के सिंडिकेट से जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के लिए की गई है। विकास अग्रवाल को मास्टरमाइंड अनवर ढेबर का बेहद करीबी माना जाता है और वह विवेक अग्रवाल का भाई है। ईडी यहां से हवाला और ज्वेलरी के जरिए हुए अवैध निवेश के सुराग तलाश रही है।
भारतमाला प्रोजेक्ट: ऐसे रची गई मुआवजे की सुनियोजित लूट
इन छापों की एक सबसे बड़ी और अहम कड़ी 'भारतमाला प्रोजेक्ट' में हुए करोड़ों के मुआवजा घोटाले से जुड़ रही है। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिस रूट से यह नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट गुजर रहा था, वहां की गोपनीय जानकारी पहले ही लीक कर दी गई थी। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष (कांग्रेस-भाजपा) के दिग्गज नेताओं ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए अपने करीबियों और रिश्तेदारों के नाम पर कौड़ियों के दाम में जमीनें खरीद लीं। बाद में जब अधिग्रहण हुआ, तो राजस्व अधिकारियों से साठगांठ कर करोड़ों रुपए का भारी-भरकम मुआवजा डकार लिया गया।
आईएएस अफसरों पर लटकी तलवार, 12 तत्कालीन कलेक्टर रडार पर
इस मामले का सबसे बड़ा पहलू नौकरशाही का नेक्सस है। राज्य के 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टर अब पूरी तरह से जांच के घेरे में आ गए हैं। ईडी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि मुआवजा बांटने के इस खेल में इन बड़े आईएएस अधिकारियों (IAS) की क्या भूमिका रही। सूत्रों की मानें तो 12 में से 6 कलेक्टरों की सीधे तौर पर संलिप्तता की आशंका है, जिन पर स्वीकृति के एवज में मोटा कमीशन लेने का गंभीर आरोप है। इनमें रायपुर, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर और दुर्ग के तत्कालीन कलेक्टरों के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
EOW की जांच पूरी, अब ED खंगाल रही कड़िया
इससे पहले, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और प्रॉपर्टी डीलरों को मिलाकर कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। ईओडब्ल्यू जल्द ही अपना अंतिम चालान पेश करने वाली है। रायपुर के बाद इस गड़बड़ी का सबसे बड़ा केंद्र कोरबा रहा है, जहां पदस्थ रहे दो महिला और एक पुरुष कलेक्टर की भूमिका संदिग्ध है। ईओडब्ल्यू की इसी एफआईआर को आधार बनाकर ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की समानांतर जांच कर रही है। करीब दो दर्जन प्रॉपर्टी डीलर और बिचौलिए भी ईडी के राडार पर हैं। आने वाले दिनों में नौकरशाही और राजनीति के कई और बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
