रायपुर में मौत को दावत देते कोचिंग सेंटर: 40 की जांच में उड़े अफसरों के होश, इमरजेंसी एग्जिट गायब, फिर भी 7 दिन की मोहलत क्यों?

रायपुर में मौत को दावत देते कोचिंग सेंटर: 40 की जांच में उड़े अफसरों के होश, इमरजेंसी एग्जिट गायब, फिर भी 7 दिन की मोहलत क्यों?

रायपुर। क्या आप भी अपने बच्चों को रायपुर के बड़े-बड़े और नामी कोचिंग सेंटर्स में पढ़ने भेज रहे हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए ही है और इसे आपको जरूर पढ़ना चाहिए। लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग के बाद जब रायपुर का प्रशासन जागा और जांच शुरू हुई, तो जो सच सामने आया है, वह डराने वाला है। शहर के करीब 40 कोचिंग सेंटर जांचे गए, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इनमें से एक भी संस्थान सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतरा है।

सोचिए, जहां बच्चे अपना सुनहरा भविष्य बनाने जा रहे हैं, वहां उनकी जान के साथ कैसा खिलवाड़ हो रहा है। न तो वहां आग बुझाने का कोई इंतजाम है और न ही किसी आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का कोई रास्ता (इमरजेंसी एग्जिट)। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि इतनी बड़ी और जानलेवा लापरवाही मिलने के बाद भी प्रशासन ने इन सेंटरों पर तुरंत ताला जड़ने के बजाय इन्हें अपनी कमियां सुधारने के लिए 7 दिन की मोहलत दे दी है।

 

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बड़े नाम, पर सुरक्षा के इंतजाम जीरो

नगर निगम, अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम लगातार शहर में जांच कर रही है। जिन संस्थानों में बच्चे भारी-भरकम फीस देकर पढ़ते हैं, वहां के हालात भी खराब मिले हैं। टीम के मुताबिक, अकादजा, आरसीसी अकादमी, आभा लाइब्रेरी और टुटेजा अकादमी जैसे संस्थानों में भी जांच के दौरान सुरक्षा को लेकर गंभीर कमियां पाई गई हैं।

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निरीक्षण में पता चला कि किसी भी संस्थान के पास फायर सेफ्टी की एनओसी (NOC) तक नहीं है। कई जगहों पर आग बुझाने वाले यंत्र गायब मिले। कुछ संस्थानों में वेंटिलेशन यानी हवा आने-जाने का सही रास्ता तक नहीं था और वहां क्षमता से ज्यादा बच्चे बैठाये जा रहे थे।

जोन 7 का हाल सबसे ज्यादा डरावना

नगर निगम की टीम जोन के हिसाब से जांच कर रही है। अब तक जोन 7 क्षेत्र में 19, जोन 10 में 7 और जोन 6 में 5 सेंटर्स की पड़ताल हो चुकी है। अगर सिर्फ जोन 7 की बात करें, तो यहां के 19 में से 10 संस्थानों में तो आपातकालीन निकासी द्वार (इमरजेंसी एग्जिट) ही नहीं है। 7 सेंटरों में आग बुझाने का कोई उपकरण नहीं मिला और 3 में पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था तक नहीं थी। ऐसे में यहां पढ़ने वाले बच्चों और किशोरों की जान हमेशा खतरे में बनी हुई है।

 

7 दिन की मोहलत, क्या हादसे का इंतजार है?

इतनी गंभीर खामियां मिलने के बाद अग्निशमन विभाग ने जरूरी सुधार की सिफारिश की है। लेकिन टीम की कार्रवाई लोगों की समझ से परे है। अधिकारियों ने तुरंत कोई कड़ा एक्शन लेने के बजाय सिर्फ नोटिस थमाया है। संस्थानों को 7 दिन के भीतर सभी कमियां दूर करने की हिदायत दी गई है।

अब शहर के लोग और अभिभावक यह पूछ रहे हैं कि अगर इन 7 दिनों के भीतर कोई अनहोनी हो गई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? कोचिंग संचालक या मोहलत देने वाले अधिकारी? बच्चों की सुरक्षा से ऐसे खिलवाड़ को आखिर कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है?

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