सरकारी वेबसाइट्स से नोटिस गायब, 24 जून को हिन्द एनर्जी कोल वाशरी की गुपचुप जनसुनवाई की तैयारी

सरकारी वेबसाइट्स से नोटिस गायब, 24 जून को हिन्द एनर्जी कोल वाशरी की गुपचुप जनसुनवाई की तैयारी

 नियमों को ताक पर रखकर प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी के क्षमता विस्तार का बुना गया गुपचुप ताना-बाना।

 

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 अरपा नदी में बहाया जा रहा ज़हरीला केमिकल युक्त पानी; जे.के. कॉलेज के छात्र और ग्रामीण घुटने को मजबूर।

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 30 दिन पहले नोटिस जारी करने का नियम हवा हवाई सरकारी महकमे और कंपनी की साठगांठ पर उठे गंभीर सवाल।

 

बिलासपुर जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मस्तूरी तहसील के ग्राम गतौरा में पर्यावरण और इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ का एक खौफनाक खेल सामने आया है। यहाँ संचालित हिन्द एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड (हिन्द ग्रुप) नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी वाशरी का क्षमता विस्तार करने की फिराक में है।

स्थानीय ग्रामीणों, छात्र संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग के अफसरों के साथ साठगांठ कर आगामी 24 जून को 'गुपचुप' तरीके से जनसुनवाई कराने की पूरी तैयारी कर ली है। इस कथित जनसुनवाई की कोई भी आधिकारिक सूचना न तो छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) की वेबसाइट पर उपलब्ध है और न ही बिलासपुर जिला प्रशासन की साइट पर, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध हो गई है।

 

पारदर्शिता का जनाजा: वेबसाइट से गायब हुआ सरकारी नोटिस

 

पर्यावरण नियमों के मुताबिक, किसी भी प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग के क्षमता विस्तार से पहले प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की जनसुनवाई अनिवार्य है। इस जनसुनवाई का नोटिस कम से कम 30 दिन पहले सरकारी वेबसाइट्स पर डालना और स्थानीय अखबारों में प्रकाशित करना कानूनन जरूरी है।

लेकिन इस मामले में पारदर्शिता का सरेआम गला घोंट दिया गया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि उनके भारी विरोध को दबाने और केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए इस सूचना को जानबूझकर आम जनता से छिपाया जा रहा है।

 

नरक बनी जिंदगियां: कोयले की कालिख में डूबा जे.के. कॉलेज

 

हिन्द वाशरी के इस काले कारोबार के चलते आसपास के गाँव गतौरा, फरहदा, खैरा, कर्रा और लगरा पूरी तरह नरक में तब्दील हो चुके हैं। चौबीसों घंटे उड़ने वाली कोयले की बारीक और ज़हरीली राख से लोगों का दम घुट रहा है, और सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां घर-घर में पैर पसार चुकी हैं।

सबसे बदतर और डरावने हालात जे.के. कॉलेज के हैं, जहां क्लासरूम से लेकर खेल के मैदान तक पर कोयले की मोटी परत जम चुकी है। यहाँ पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं आंखों में भयानक जलन, फेफड़ों की बीमारी और सांस लेने की तकलीफ झेलने को मजबूर हैं।

यही नहीं, गतौरा रेलवे स्टेशन का भी बुरा हाल है, जहां यात्री, महिलाएं, बच्चे और रेलकर्मी चौबीसों घंटे कोयले की धूल फांक रहे हैं। भारी वाहनों के बेधड़क दौड़ने से इलाके की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जो लगातार जानलेवा दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रही हैं।

अरपा का कत्ल: ज़हरीले पानी से पाताल में गया भूजल

इलाके की जीवनदायिनी अरपा नदी और खारून नदी अब इस वाशरी के चलते दम तोड़ रही हैं। कोयला धुलाई का केमिकल युक्त जहरीला काला पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे इन पवित्र नदियों में बहाया जा रहा है, जिससे जलीय जीवन पूरी तरह नष्ट हो चुका है और भूजल ज़हरीला हो गया है।

मुनाफे की हवस में अंधी हो चुकी कंपनी द्वारा 50 हॉर्स पावर की 20 से अधिक हैवी मोटरें चौबीसों घंटे चलाकर बेरहमी से भूजल का दोहन किया जा रहा है। इसके कारण आसपास के तमाम गाँवों के बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं और पानी का स्तर 350 फीट नीचे पाताल में चला गया है, जिससे किसानों की खेती पूरी तरह चौपट हो गई है।

रोजगार से दूरी, टैक्स में चोरी: स्थानीय युवाओं के हक पर डाका

इस भयानक तबाही और प्रदूषण को झेलने के बावजूद स्थानीय युवाओं को कंपनी में रोजगार के नाम पर ठगा गया है। कंपनी द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के करोड़ों रुपयों की सरेआम अनदेखी की जा रही है और इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जो कंपनी पहले भी करोड़ों रुपये की जीएसटी टैक्स चोरी के मामले में सरकारी कार्रवाई का सामना कर चुकी है, उसके हौसले आज प्रशासनिक शह पर बुलंद हैं। अब देखना यह है कि बिलासपुर प्रशासन इस 'गुपचुप' साजिश पर मूकदर्शक बना रहता है या जनता को इस जानलेवा नरक से बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है।

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