न कार्यालय , न विज्ञापन, फिर भी बीज निगम में दे दी नौकरी! एमडी का डिजिटल हस्ताक्षर स्कैन कर बांटे नियुक्ति पत्र
रायपुर। राजधानी रायपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। शातिर ठगों ने शातिर तरीके से छत्तीसगढ़ राज्य बीज व कृषि विकास निगम को टारगेट किया है
निगम में न तो भर्ती के लिए आवेदन मंगाए गए और न ही कोई पद खाली था। इसके बावजूद, डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद का फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर जारी कर दिया गया। धोखाधड़ी इतनी सफाई से की गई कि नियुक्ति आदेश में निगम के महाप्रबंधक विनोद वर्मा के डिजिटल हस्ताक्षर बाकायदा स्कैन करके चिपका दिए गए, ताकि किसी को जरा भी शक न हो।
फर्जीवाड़े का का खुलासा तब हुआ जब कसडोल के हांडापारा के युवक हेमंत साहू यह नियुक्ति पत्र लेकर ड्यूटी ज्वाइन करने पहुंच गया। उसे जो पत्र थमाया गया था, उसमें 6 जुलाई से कसडोल कार्यालय में नियुक्त होने की बात थी। हेमंत ने जब वहां पहुंचा और उसका नियुक्ति पत्र सहित अन्य जरूरी दस्तावेज विभागीय स्तर से महाप्रबंधक के पास पहुंचे, तो पूरे विभाग में हड़कंप मच गया।
जांच में पता चला कि जिस कसडोल में हेमंत को पोस्टिंग दी गई थी, वहां निगम का कोई कार्यालय है ही नहीं। इसके अलावा, थमाए गए पत्र में न तो कोई जावक क्रमांक दर्ज था और न ही कोई जारी करने की तारीख लिखी गई थी। निगम प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि अक्टूबर 2024 के बाद से डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर भर्ती के लिए न तो कोई आवेदन मंगाया गया है और न ही विभाग की तरफ से कोई भी नियुक्ति पत्र जारी हुआ है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाप्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने फौरन धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है और अपनी जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने ऐसे कितने युवाओं को अपने जाल में फंसाकर नियुक्ति पत्र बांटे हैं और नौकरी के नाम पर कितनी मोटी रकम की वसूली की गई है।
डिजिटल तकनीक से जालसाज तैयार कर रहे असली दिखने वाले आदेश, ऐंठ रहे मोटी रकम
ठग अब धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए एडवांस डिजिटल सॉफ्टवेयर और नई Ai तकनीक का सहारा ले रहे हैं। इसके जरिए वे बिल्कुल असली दिखने वाले सरकारी आदेश और नियुक्ति पत्र तैयार कर लेते हैं, जिनमें बड़े अधिकारियों के जैसे एकदम सटीक हस्ताक्षर भी शामिल होते हैं। इसी तकनीक के दम पर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को झांसे में लिया जा रहा है।
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 5 मार्च को सामान्य प्रशासन विभाग के नाम पर भी इसी तरह का फर्जी नियुक्ति आदेश वायरल किया गया था। उस मामले में परिवहन, राजस्व आपदा प्रबंधन, वन-जलवायु परिवर्तन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और स्कूल शिक्षा विभाग में अलग-अलग पदों पर भर्ती की अनुशंसा का दिखावा किया गया था। जालसाजों ने इतनी चालाकी दिखाई थी कि उस फर्जी आदेश में विभागीय सचिव रजत कुमार और उप सचिव शिव कुमार सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर का भी दुरुपयोग किया गया था। जालसाजों का यह तरीका सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
मोबाइल नंबर और डिजिटल रिकॉर्ड से खुलेगा राज
पुलिस के लिए अब इस मामले में फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने वाले तक पहुंचना महत्वपूर्ण है। इसके लिए पत्र भेजने वाले मोबाइल नंबर, वाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और नियुक्ति पत्र के डिजिटल स्रोत की जांच की जा सकती है।
साथ ही पुलिस यह भी पता करेगी कि हेमंत साहू नामक व्यक्ति को वास्तव में नौकरी का झांसा दिया गया था या उसके नाम का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति ने किया।
