अफीम केस में पूर्व BJP नेता को बड़ी राहत, हाईकोर्ट से जमानत; ‘खेत में मौजूद नहीं थे’ बना अहम आधार
दुर्ग: अफीम की कथित अवैध खेती से जुड़े मामले में जेल में बंद पूर्व भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को उनकी जमानत याचिका मंजूर कर दी। अदालत के सामने यह तथ्य अहम रहा कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान विनायक ताम्रकार मौके पर मौजूद नहीं थे और उनके व्यक्तिगत कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं किया गया था।
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कई शर्तें भी तय की हैं। विनायक ताम्रकार को दुर्ग जिले की सीमा से बाहर नहीं जाने, जांच में पुलिस का सहयोग करने और मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ चल रहा मुकदमा खत्म हो गया है। मामले में आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में होना है।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मिली राहत
हाईकोर्ट ने जमानत पर विचार करते समय यह भी ध्यान में रखा कि पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है और 29 जुलाई को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। इसी मामले में सह आरोपी सुखराम विश्नोई और मदरूपा राम विश्नोई को भी 31 जुलाई को जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों और मामले के उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद अदालत ने विनायक ताम्रकार को भी जमानत देने का निर्णय लिया।
FIR और चार्जशीट रद्द कराने की मांग ठुकराई
जमानत के साथ विनायक ताम्रकार को दूसरी याचिका में राहत नहीं मिली। उन्होंने FIR और पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट को ही रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि इस स्तर पर साक्ष्यों की विस्तृत पड़ताल करके यह तय करना उचित नहीं होगा कि आरोप सही हैं या नहीं। ऐसा करने से ट्रायल शुरू होने से पहले ही मामले के गुण-दोष पर फैसला करने जैसी स्थिति बन जाएगी। इसलिए FIR और चार्जशीट रद्द करने की मांग खारिज कर दी गई।
करीब 8 करोड़ के अफीम पौधों की जब्ती का दावा
मामले की शुरुआत 6 मार्च को ग्राम समोदा में हुई पुलिस कार्रवाई से हुई थी। जेवरा-सिरसा पुलिस चौकी की टीम ने करीब पांच एकड़ जमीन पर कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में कथित अफीम के पौधे बरामद किए थे। पुलिस ने इनकी अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये बताई थी। कार्रवाई के दौरान विकास बिश्नोई मौके पर मिला था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया। बाद की जांच में जमीन के रिकॉर्ड की पड़ताल की गई, जिसमें खेत मधुमति ताम्रकार और प्रीतिबाला ताम्रकार के नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने खेती से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच शुरू की।
कई एजेंसियों ने मिलकर की जांच
अफीम की खेती के मामले की जांच में पुलिस के साथ राजस्व, आबकारी, नारकोटिक्स और अपराध जांच से जुड़ी टीमों ने भी कार्रवाई में हिस्सा लिया। पुलिस ने कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। जांच के दौरान विनायक ताम्रकार समेत तीन लोगों को पुलिस ने मुख्य आरोपी बनाया था। विनायक को 7 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में था।
939 पन्नों की चार्जशीट, 78 गवाह
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अदालत में करीब 939 पन्नों का आरोप पत्र पेश किया है। अभियोजन पक्ष ने मामले में 78 गवाहों को सूचीबद्ध किया है। अदालत में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू होने की बात सामने आई है। मामले में अब तक चार आरोपियों को जमानत मिल चुकी थी। विनायक ताम्रकार को राहत मिलने के बाद जमानत पाने वाले आरोपियों की संख्या पांच हो गई है।
जमानत मिली, लेकिन मुकदमा जारी रहेगा
हाईकोर्ट के फैसले से विनायक ताम्रकार को जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हुआ है, लेकिन अफीम की कथित खेती से जुड़े आरोपों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। FIR और चार्जशीट बरकरार हैं और अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगी। यानी अदालत का मौजूदा आदेश केवल जमानत तक सीमित है। आरोप सही हैं या नहीं और किसकी भूमिका कितनी थी, इसका फैसला आगे होने वाले ट्रायल और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
