जल संसाधन विभाग में महाघोटाला: ई-इन-सी ने पोर्टल में जाली एंट्री कर चहेते ठेकेदार पर लुटाए 14 करोड़, वित्त विभाग को भी दिया धोखा

राष्ट्रीय जगत विजन एक्सक्लूसिव | रायपुर छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार और मनमानी का संगीन मामला सामने आया है। विभाग के सबसे बड़े अफसर, प्रमुख अभियंता (ई-इन-सी) इंद्रजीत उइके पर अपनी कुर्सी और पावर का गलत इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाने का सीधा आरोप लगा है। गरियाबंद जिले के पैरी नहर प्रोजेक्ट में वित्त विभाग की आंखों में धूल झोंककर चहेते पेटी ठेकेदार को अंधाधुंध पैसा बांटा गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को चकमा देने के लिए पोर्टल पर फर्जी आदेश नंबर डालकर करोड़ों रुपए के बिल पास कर दिए गए। यह सीधे तौर पर एक बड़ा आर्थिक अपराध है।

 

क्या है घोटाले का पूरा ग्राउंड?

यह पूरा खेल गरियाबंद संभाग के पैरी दाईं तट मुख्य नहर और फिंगेश्वर वितरक शाखा के लाइनिंग काम से जुड़ा है। (अनुबंध क्र. 02/ डीएल 2020-21)। यह ठेका 26 मई 2020 को अशोक कुमार मित्तल के नाम पर छूटा था। लेकिन, मौके पर असली काम अनिल सिंह चंदेल नाम के एक पेटी ठेकेदार (सब-कॉन्ट्रैक्टर) ने किया। आरोप है कि ई-इन-सी कार्यालय ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, एक अयोग्य ठेकेदार को बैकडोर से यह काम सौंप दिया। 

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मंजूरी का इंतजार नहीं, लुटा दिए 28% ज्यादा पैसे

इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2008 में 53 करोड़ (5307.78 लाख) रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। बाद में 2019 में करीब 33 करोड़ (3303.27 लाख) का टेंडर हुआ। समय के साथ काम का बजट बढ़ा तो विभाग ने 13 सितंबर 2024 को सरकार के पास 83 करोड़ (8306.38 लाख) रुपए की नई (पुनरीक्षित) मंजूरी का प्रस्ताव भेजा। 

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असली धांधली यहीं से शुरू हुई। ई-इन-सी ने सरकार से नई मंजूरी मिलने का इंतजार तक नहीं किया। विभाग ने अपने स्तर पर ही मनमाने तरीके से 67 करोड़ (6776.23 लाख) रुपए खर्च कर डाले और चहेते ठेकेदार को पेमेंट कर दिया। यह रकम मूल तय बजट से लगभग 14 करोड़ (1468.45 लाख) रुपए ज्यादा है। यानी स्वीकृत राशि से करीब 28% ज्यादा का भुगतान बिना परमिशन के कर दिया गया। 

पोर्टल में जाली नंबर डालकर सिस्टम को हैक किया

सरकारी नियम बिल्कुल स्पष्ट है कि इमरजेंसी की हालत में भी बिना वित्त विभाग की मंजूरी के तय बजट से 10% से ज्यादा का पेमेंट किसी भी कीमत पर नहीं हो सकता। जल संसाधन विभाग में बिल पास करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। सॉफ्टवेयर में ऐसा लॉक लगा है कि बिना वित्त विभाग के आदेश नंबर के सिस्टम 10% से ज्यादा का बिल स्वीकार ही नहीं करता। 

यहीं पर अफसरों ने 'बड़ा खेल' किया। ई-इन-सी इंद्रजीत उइके ने सिस्टम को बायपास करने के लिए अपने अधीनस्थ अधिकारियों से मिलीभगत की। पोर्टल में वित्त विभाग का कोई जाली पत्र क्रमांक और फर्जी तारीख दर्ज कर दी गई। इसी फर्जीवाड़े के जरिए चहेते पेटी ठेकेदार अनिल सिंह चंदेल को हाल ही में 3.91 करोड़ (391.85 लाख) रुपए का ताजा भुगतान कर दिया गया। 

 

कड़ी कार्रवाई की दरकार

इस पूरे खुलासे से साफ है कि प्रमुख अभियंता श्री उइके ने अपने पद का खुला दुरुपयोग किया है। ठेकेदार से साठगांठ कर नियमों को ताक पर रखा गया। इस आर्थिक अपराध को छिपाने के लिए अपने आला अफसरों और वित्त विभाग तक को अंधेरे में रखा गया। जाली दस्तावेजों के सहारे करोड़ों का पेमेंट करने के इस गंभीर और आपराधिक मामले में अब ई-इन-सी और जिम्मेदार अफसरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सिस्टम से खिलवाड़ करने वालों को सबक मिल सके।

Edited By: VINOD CHANDRA
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