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मुंगेली में अफसरशाही का नशा: अफीम की खेती पर IAS की गुंडागर्दी,थानेदारों से मांगा NOC; डांट से रो पड़ीं महिला अफसर
मुंगेली/रायपुर । छत्तीसगढ़ में इन दिनों अफीम की खेती खूब सुर्खियां बटोर रही है। पिछले 20 दिनों में रायगढ़, दुर्ग और बलरामपुर में अवैध अफीम की खेती के 5 बड़े मामले सामने आए हैं। सरकार फुल टेंशन में है और ऊपर से सख्त निर्देश हैं कि अब प्रदेश में कहीं भी अफीम न उगे। लेकिन मुंगेली जिले में इस आदेश का असर कुछ अलग ही लेवल पर दिख रहा है। यहां के एक IAS साहब ने अफीम रोकने के नाम पर पुलिस विभाग की ही नाक में दम कर दिया है। आलम यह है कि साहब की इस 'प्रशासनिक गुंडागर्दी' से परेशान होकर एक डिप्टी रैंक की महिला अफसर तो फूट-फूट कर रो पड़ीं।
थानेदारों से मांग रहे 'नो अफीम' का NOC
IAS साहब का नया फरमान सुनेंगे तो आप भी अपना माथा पीट लेंगे। वे ग्रामीण इलाकों के SDOP और शहरी थानों के प्रभारियों (टीआई) से लिखित में NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) मांग रहे हैं। साहब का साफ कहना है कि "लिखकर दो कि तुम्हारे थाना क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अफीम की खेती नहीं हो रही है।"
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या थानेदार अब मुजरिमों को पकड़ने के बजाय खेत-खेत जाकर फसलें चेक करेंगे? पुलिस का काम लॉ एंड ऑर्डर देखना है या कृषि विस्तार अधिकारी बनना? लेकिन IAS साहब तो जैसे पुलिस महकमे को अपना अर्दली समझ बैठे हैं। सही कहें तो साहब चाहते हैं कि पुलिसवाले अब अपराधियों की गन छोड़ें और खेतों में जाकर अफीम के फूल सूंघें।
फटकार ऐसी कि रो पड़ीं महिला अफसर
सूत्रों की मानें तो, अफीम के इसी मामले को लेकर हाल ही में साहब ने मीटिंग ली थी। इस दौरान उन्होंने एक डिप्टी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी को इतनी बुरी तरह से लताड़ा कि उनका मनोबल ही टूट गया और वे मीटिंग में ही रोने लगीं। साहब का यह बर्ताव देखकर वहां मौजूद बाकी अफसर भी सन्न रह गए। अब पुलिस महकमे में साहब के इस रवैये को लेकर भारी नाराजगी है। दबी जुबान में पुलिसकर्मी कह रहे हैं कि सरकार ने अफीम रोकने को कहा था, पुलिसवालों को टॉर्चर करने को नहीं।
सरकार पर विपक्ष का प्रेशर, मुंगेली में साहब का पावर गेम
दरअसल, यह सारा बवाल इसलिए मचा है क्योंकि मार्च के इसी महीने में छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपए की अफीम पकड़ी गई है। दुर्ग में एक नेता के खेत से मामला शुरू हुआ और रायगढ़-बलरामपुर तक पहुंच गया। विपक्ष इसे लेकर सरकार पर हमलावर है। इसी सियासी प्रेशर में सरकार ने सभी कलेक्टरों को सख्त हिदायत दी है।
पर मुंगेली के इन IAS साहब ने इस हिदायत को अपनी तानाशाही का टूल बना लिया है। खेतों में उग रही अफीम का नशा तो पुलिस उतार ही रही है, लेकिन साहब के सिर पर चढ़े इस 'पावर के नशे' का इलाज कौन करेगा? यह पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
