भ्रष्टाचार पर सरकार का दोहरा रवैया: आखिर राठौर को कौन बचा रहा?
रायपुर। सूबे में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। अरपा भैंसाझार चकरभाठा वितरक निर्माण में 3.42 करोड़ रुपये के मुआवजे के भुगतान में हुई अनियमितता के मामले में तत्कालीन कलेक्टर बिलासपुर की जांच रिपोर्ट में पांच राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। जिसके बाद सिर्फ आनंदरूप तिवारी (तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भूअर्जन अधिकारी कोटा) को निलंबित किया गया है साथ ही पटवारी मुकेश साहू को बर्खास्त कर दिया गया है, लेकिन कीर्तिमान राठौर (तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भूअर्जन अधिकारी) को अभी तक निलंबित क्यों नहीं किया गया, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं।
एक ही जमीन, करोड़ों का मुआवजा खेल
यह पूरा मामला एक ही खसरे को अलग-अलग बताकर 3.42 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान करने से जुड़ा है। आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल में कीर्तिमान राठौर को संरक्षण दिया गया, जिसके चलते उन्हें बचाने के लिए दोबारा जांच का खेल खेला गया। पहली जांच रिपोर्ट को कथित तौर पर दरकिनार कर दिया गया और दूसरी जांच रिपोर्ट के आधार पर केवल पटवारी मुकेश साहू को बर्खास्त किया गया।
पूर्ववर्ती सरकार में था भ्रष्टाचार चरम पर?
बताया जा रहा है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान हर विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर था और "कांग्रेस संरक्षित अधिकारी" मनमानी कर रहे थे। बिलासपुर के तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार ने 24 फरवरी 2023 को अपनी जांच रिपोर्ट में भैंसाझार चकरभाठा वितरक निर्माण में अनियमितता के लिए दो अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भूअर्जन अधिकारी, एक तहसीलदार और दो पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की थी।
दोबारा जांच और कुछ को क्लीन चिट
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेसी नेताओं ने 3.42 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि में से आधी रकम कथित तौर पर "झोर" ली। सौरभ कुमार के जांच आदेश को "रद्दी में डालकर" दूसरे कलेक्टर अवनीश शरण से जांच कराई गई। इस दूसरी जांच में अवनीश शरण ने चार अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी और केवल पटवारी मुकेश साहू को बर्खास्त कर दिया। भाजपा के सत्ता में आने के बाद जब 3.42 करोड़ के मुआवजे को लेकर हंगामा मचा, तो इसी महीने की 3 जून 2025 को आनंदरूप तिवारी को निलंबित कर दिया गया।
तत्कालीन एसडीएम कीर्तिमान राठौर को क्यों नहीं किया निलंबित?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई है, तो तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भूअर्जन अधिकारी कीर्तिमान राठौर (जो वर्तमान में अपर कलेक्टर रायपुर हैं) को तत्काल निलंबित क्यों नहीं किया गया? सूत्रों का कहना है कि कीर्तिमान राठौर को निलंबित न किए जाने के पीछे बिलासपुर जिले के एक मंत्री का संरक्षण होने की बात सामने आ रही है। यह स्थिति सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर सवाल खड़े करती है और दिखाती है कि कुछ अधिकारियों को अभी भी वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है।
