डिजिटल रिकॉर्ड ने खोली ‘मराठा’ की पूरी कुंडली, 11 साल में 17 केस; अब NSA के तहत 3 महीने जेल

डिजिटल रिकॉर्ड ने खोली ‘मराठा’ की पूरी कुंडली, 11 साल में 17 केस; अब NSA के तहत 3 महीने जेल

दुर्ग। वर्षों पुराने पुलिस रिकॉर्ड अब सिर्फ फाइलों में दबे दस्तावेज नहीं रह गए हैं। डिजिटल रिकॉर्ड और डेटा आधारित पुलिसिंग के जरिए अपराधियों के पुराने और वर्तमान मामलों को एक साथ खंगालने का असर अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। दुर्ग में पुलिस की रिकॉर्ड समीक्षा के दौरान एक हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ दर्ज 17 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड सामने आया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। 

छावनी थाना क्षेत्र के मिलन चौक, कैम्प-02 भिलाई निवासी शुभम तागड़े उर्फ ‘मराठा’ (29 वर्ष) के खिलाफ वर्ष 2015 से 2026 तक कुल 17 आपराधिक प्रकरण दर्ज पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ चोरी, मारपीट, लूट, अवैध हथियार, आबकारी कानून और अन्य गंभीर प्रकृति के मामले दर्ज हैं। आपराधिक गतिविधियों और लोक व्यवस्था पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए जिला दंडाधिकारी, दुर्ग ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के तहत निरुद्ध करने का आदेश जारी किया है। आदेश के बाद शुभम तागड़े को तीन महीने के लिए केंद्रीय जेल, दुर्ग में रखा गया है।

11 साल का रिकॉर्ड खंगाला तो सामने आए 17 मामले
दुर्ग पुलिस की ओर से पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को डिजिटल और अद्यतन किए जाने की प्रक्रिया के दौरान शुभम तागड़े का रिकॉर्ड भी खंगाला गया। समीक्षा में वर्ष 2015 से 2026 के बीच उसके खिलाफ दर्ज कुल 17 प्रकरण सामने आए। पुलिस के मुताबिक, खास बात यह है कि उसके खिलाफ हाल के वर्षों में भी मामले दर्ज हुए हैं। यानी आपराधिक गतिविधियों का रिकॉर्ड केवल पुराना नहीं, बल्कि वर्ष 2025 और 2026 तक जारी रहा है।

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रिकॉर्ड में दर्ज प्रमुख प्रकरणों का विवरण इस प्रकार है—

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  • अपराध क्रमांक 22/2015 – धारा 294, 506, 323, 34 भादवि
  • अपराध क्रमांक 64/2015 – धारा 457, 380 भादवि
  • अपराध क्रमांक 21/2017 – धारा 379 भादवि
  • अपराध क्रमांक 28/2017 – धारा 379 भादवि
  • अपराध क्रमांक 206/2018 – धारा 25 आर्म्स एक्ट
  • अपराध क्रमांक 421/2018 – धारा 457, 380, 34 भादवि
  • अपराध क्रमांक 420/2018 – धारा 457, 380 भादवि
  • अपराध क्रमांक 323/2019 – धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट
  • अपराध क्रमांक 333/2022 – धारा 392 भादवि
  • अपराध क्रमांक 616/2022 – धारा 294, 506बी, 323 भादवि
  • अपराध क्रमांक 624/2022 – धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट
  • अपराध क्रमांक 375/2023 – धारा 327, 294, 506बी, 323, 34 भादवि
  • अपराध क्रमांक 376/2023 – धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट
  • अपराध क्रमांक 165/2025 – धारा 34(2) आबकारी अधिनियम
  • अपराध क्रमांक 468/2025 – धारा 74 बीएनएस एवं धारा 7, 8 पॉक्सो एक्ट
  • अपराध क्रमांक 469/2025 – धारा 126(2), 309(4) बीएनएस एवं पॉक्सो एक्ट
  • अपराध क्रमांक 414/2026 – धारा 34(2) आबकारी अधिनियम

पुराने रिकॉर्ड से लेकर नए मामलों तक पुलिस की नजर
दुर्ग पुलिस के अनुसार, पहले किसी व्यक्ति के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी जुटाने के लिए अलग-अलग रजिस्टर, थानों के दस्तावेज और पुराने अभिलेखों को खंगालना पड़ता था। डिजिटल व्यवस्था के बाद यह प्रक्रिया काफी आसान हुई है। अब किसी व्यक्ति से जुड़े पुराने और नए मामलों की जानकारी को एक साथ देखकर उसके आपराधिक इतिहास का विश्लेषण किया जा सकता है। इसी व्यवस्था के जरिए लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय लोगों को चिन्हित करने और उनके खिलाफ उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने में तेजी आई है।

रिकॉर्ड सामने आया तो NSA तक पहुंची कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, शुभम तागड़े के खिलाफ उपलब्ध आपराधिक रिकॉर्ड और लोक व्यवस्था के लिए प्रतिकूल गतिविधियों की समीक्षा के बाद जिला दंडाधिकारी, दुर्ग के समक्ष आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव रखा गया। रिकॉर्ड और परिस्थितियों के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के तहत निरुद्ध करने का आदेश जारी किया गया। इसके बाद उसे तीन महीने के लिए केंद्रीय जेल, दुर्ग भेजा गया। यह कार्रवाई इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस अब केवल किसी एक नए अपराध की जांच तक सीमित नहीं रहकर आरोपी के लंबे आपराधिक इतिहास और लगातार सामने आ रहे मामलों को भी समग्र रूप से देख रही है।

CCTNS बना पुलिसिंग का डिजिटल हथियार
दुर्ग पुलिस पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में व्यवस्थित करने के साथ-साथ CCTNS और अन्य तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल भी कर रही है। पुलिस के अनुसार, पुराने मामलों, आरोपियों और उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी को ऑनलाइन एवं अद्यतन करने से अपराधियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड की समीक्षा में समय कम लग रहा है। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे विवेचना, अपराध विश्लेषण और कानून व्यवस्था से जुड़े निर्णयों को अधिक डेटा आधारित बनाने में मदद मिल रही है।

‘मराठा’ की कार्रवाई में CCTNS टीम की भी अहम भूमिका
दुर्ग पुलिस के मुताबिक, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को संकलित करने, उन्हें ऑनलाइन एवं अद्यतन करने और प्रकरणवार जानकारी की जांच करने में CCTNS प्रभारी, ऑपरेटरों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन्हीं डिजिटल रिकॉर्ड्स की मदद से वर्षों पुराने मामलों को एक साथ देखा गया और सक्रिय अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं।

अब सिर्फ अपराध नहीं, पूरा रिकॉर्ड देखेगी पुलिस
दुर्ग पुलिस का कहना है कि अपराधियों के रिकॉर्ड की समीक्षा की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। ऐसे व्यक्ति जो लगातार आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय पाए जाएंगे और जिनकी गतिविधियों से लोक व्यवस्था या नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है, उन्हें उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर चिन्हित किया जाएगा। पुलिस का फोकस अब ‘अपराध होने के बाद कार्रवाई’ से आगे बढ़कर ‘रिकॉर्ड के आधार पर समय रहते कार्रवाई’ करने की दिशा में है। शुभम तागड़े उर्फ ‘मराठा’ पर NSA की कार्रवाई इसी डेटा आधारित पुलिसिंग का एक उदाहरण है, जहां करीब 11 साल के आपराधिक रिकॉर्ड को एक साथ देखने के बाद कार्रवाई का रास्ता तैयार हुआ।

पुलिस की आम लोगों से अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली किसी भी संदिग्ध या आपराधिक गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। पुलिस ने कहा कि अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने में आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

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