पढ़ाई के 50 दिन बीते, अब मानदेय का नया पेंच: अतिथि व्याख्याताओं को रोज के दो हजार का नियम नहीं आ रहा रास
बिलासपुर | कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति का मामला सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। पहले तो देरी के चलते कॉलेजों में पढ़ाई के 50 दिन खराब हो गए। पहले सेमेस्टर की जरूरी 90 दिनों की क्लास में से मुश्किल से 40 दिन ही बचे हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं आधी-अधूरी तैयारी के साथ परीक्षा कक्ष में बैठेंगे। अब जब जॉइनिंग का रास्ता खुला, तो मानदेय के नए नियम ने अतिथि व्याख्याताओं के लिए नई परेशानी खड़ी कर दी है। नई व्यवस्था में उन्हें प्रतिदिन केवल 2 हजार और माह में अधिकतम 50 हजार रुपए ही दिए जाएंगे। पहले दफ्तरी कार्यों के लिए जो 400 रुपए अलग से मिलते थे, वह व्यवस्था भी अब हटा दी गई है।
सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई की हालत किसी से छिपी नहीं है। राज्य के कॉलेजों में व्याख्याता, ग्रंथपाल और क्रीड़ाधिकारी के 3300 से ज्यादा पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस कमी को दूर करने अतिथि व्याख्याता नीति के तहत 2,406 व्याख्याताओं का चयन किया गया। लेकिन जॉइनिंग की फाइल वित्त विभाग में ही धूल खाती रही। इसी लेटलतीफी के कारण 12 अगस्त को अतिथि व्याख्याताओं को अपनी नियुक्तियों को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा था। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से गुहार लगाने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने मांगें मानी। आदेश जारी हुआ और जॉइनिंग प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन मानदेय में किए गए बदलाव से व्याख्याताओं का पारा फिर चढ़ गया है। दरअसल, कॉलेजों में पीरियड कम मिलने की शिकायतों के बाद ही मानदेय नियम बदला गया था, पर अब इसी बदलाव को लेकर अतिथि व्याख्याता फिर से लामबंद होने की तैयारी में हैं।
25 वर्किंग डे नहीं, तो 50 हजार कैसे मिलेंगे
इस पूरे मामले में कुछ अतिथि व्याख्याताओं की मीडिया से चर्चा हुई। इस दौरान उनका दर्द छलक पड़ा कि किसी भी महीने में आमतौर पर 25 वर्किंग डे नहीं होते। जब प्रतिदिन के हिसाब से दो हजार रुपए ही मिलने हैं, तो हर महीने 50 हजार रुपए का मानदेय पाना संभव ही नहीं है। ऊपर से अब रोजाना साढ़े सात घंटे ड्यूटी करने का नियम भी थोप दिया गया है। वे काम करने को तैयार हैं, लेकिन कार्यालयीन काम के लिए अलग से मिलने वाले 400 रुपए तो मिलने ही चाहिए।
पहले पीरियड के हिसाब से होता था भुगतान
उच्च शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था के तहत अतिथि व्याख्याताओं के लिए प्रतिदिन 2,000 रुपए का मानदेय तय कर दिया गया है। अधिकतम सीमा 50,000 रुपए प्रतिमाह रखी गई है। विभाग का दावा है कि इस फिक्स दैनिक मानदेय से पीरियड आवंटन को लेकर होने वाले विवादों पर लगाम लगेगी। पहले 40-45 मिनट के पीरियड के 400 रुपए और 60 मिनट के 500 रुपए मिलते थे। रोजाना अधिकतम 4 पीरियड के भुगतान से 1,600 रुपए (करीब 41,600 प्रतिमाह) या 2,000 रुपए (करीब 50,000 प्रतिमाह) तक मिलते थे। कम पीरियड मिलने से आमदनी घट जाती थी।
पढ़ाई पर कोई असर नहीं: डॉ.एसआर कमलेश
इधर, प्रभारी क्षेत्रीय अपर संचालक डॉ. एसआर कमलेश का कहना है कि अभी कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के प्रवेश ही चल रहे हैं। नियमित प्राध्यापक क्लास ले रहे हैं, इसलिए पढ़ाई प्रभावित होने जैसी कोई बात नहीं है। शासन ने जो नियम लागू किए हैं, उसी के आधार पर मानदेय दिया जाएगा। यानी 50 दिन बिना गेस्ट लेक्चरर्स के गुजर गए और विभाग के नजरिए से सब कुछ एकदम दुरुस्त है।
