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DSP कल्पना वर्मा केस: दिल्ली के एक फोन से मचा हड़कंप! प्रदेश के सबसे बड़े अफसर ने पुलिस मुखिया से पूछा- बिना जांच इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों?
रायपुर। पुलिस महकमे में DSP कल्पना वर्मा के सस्पेंशन मामले में अब एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। 21 मुकदमों के आरोपी हिस्ट्रीशीटर दीपक टंडन को बचाने और एक महिला अफसर को फंसाने की 1400 पन्नों की स्क्रिप्ट पर अब दिल्ली की नजर पड़ गई है। पुलिस के बड़े साहब ने बिना रिपोर्ट पढ़े ही फाइल आगे बढ़ा दी थी, लेकिन अब ऊपर से जवाब-तलब होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
दिल्ली के फोन से पुलिस महकमे से सवाल-जवाब
सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली से सीधे छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी के पास एक अहम फोन कॉल आया। इस फोन कॉल के बाद प्रदेश के इस सबसे बड़े अफसर ने सीधे पुलिस विभाग के सबसे बड़े अधिकारी को तलब कर लिया। उनसे कड़े शब्दों में पूछा गया- "बिना तथ्यों की जांच किए और बिना रिपोर्ट पढ़े एक अफसर पर इतनी बड़ी कार्रवाई आखिर क्यों की गई?" इस एक सवाल ने पुलिस महकमे के आला अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। सच्चाई यह है कि पुलिस के बड़े साहब ने 1400 पन्नों की मोटी जांच रिपोर्ट को पढ़ना तक जरूरी नहीं समझा और आंख मूंदकर गृह सचिव को निलंबन के लिए भेज दिया।
विधायक के PA के सामने गिड़गिड़ाया जांच अधिकारी
इस पूरी फर्जी कहानी में सबसे बड़ा दाग उस जांच अधिकारी (एडिशनल एसपी) पर है, जिसने यह रिपोर्ट बनाई है। महकमे में चर्चा है कि बीते 15 मार्च को यही जांच अधिकारी एक रसूखदार विधायक के पीए के सामने अपनी नौकरी बचाने की भीख मांग रहा था। उसने यहाँ तक कहा, "मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं, मुझे बचा लीजिए।" एक एडिशनल एसपी रैंक का अफसर एक पीए के पैरों में क्यों गिर रहा था, इसके तार उसकी पुरानी फाइलों से जुड़े हैं।
दरअसल, इस जांच अधिकारी का अपना रिकॉर्ड ही दागी है। धमतरी में पोस्टिंग के दौरान इस पर वीआईपी रोड स्थित 'करेंसी टावर' में करोड़ों का ऑफिस और दुकान खरीदने के आरोप लगे थे। इसकी जांच रिपोर्ट आज भी आईजी दफ्तर में धूल फांक रही है। माना जा रहा है कि अपनी नौकरी जाने और इसी पेंडिंग फाइल के डर से अफसर पर दबाव बनाया गया। खुद की कुर्सी बचाने के चक्कर में उसने एक हिस्ट्रीशीटर के इशारे पर डीएसपी कल्पना वर्मा को बलि का बकरा बना दिया।
अपराधी की बातों को मान लिया 'वेद-वाक्य'
1400 पन्नों की यह रिपोर्ट पूरी तरह से हवा-हवाई है। इसमें आरोप है कि डीएसपी ने हिस्ट्रीशीटर से महंगे गिफ्ट लिए, 2.5 करोड़ की वसूली की और माओवाद क्षेत्र की खुफिया जानकारी लीक कर दी। पुलिस ने एक आदतन अपराधी के बयानों को ही गीता का ज्ञान मान लिया। व्हाट्सएप चैट का सहारा लेकर इतनी भारी-भरकम कहानी सिर्फ इसलिए रची गई, ताकि केस मजबूत दिखे और निलंबन में कोई रुकावट न आए।
सिस्टम पर उठे सवाल.....
अब पूरा सिस्टम कठघरे में है। एक हिस्ट्रीशीटर के कहने पर बिना जांच किए एक अफसर की वर्दी दांव पर लगा दी गई। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर डीएसपी कल्पना वर्मा पर इतनी फुर्ती से कार्रवाई हो सकती है, तो भ्रष्टाचार में डूबे और नेताओं के पीए के आगे गिड़गिड़ाने वाले एडिशनल एसपी की फाइल अब तक बंद क्यों है? क्या पुलिस विभाग के नियम-कानून सिर्फ उन्हें फंसाने के लिए बने हैं, जो रसूखदारों के आगे नहीं झुकते?
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
