महादेव एप केस: 'मिस्ट्री स्पिनर' के नाम से ओमान पहुंचा सौरभ, फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट ने बढ़ाई भारत लाने की चुनौती

महादेव एप केस: 'मिस्ट्री स्पिनर' के नाम से ओमान पहुंचा सौरभ, फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट ने बढ़ाई भारत लाने की चुनौती

रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की फरारी का खेल अब खत्म हो गया है। ओमान में उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है। भारतीय जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर रहने के लिए सौरभ ने न केवल अपनी नागरिकता बदली, बल्कि जन्मतिथि में भी हेरफेर कर दिया। मीडिया की पड़ताल में सामने आया है कि उसने एक फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के सहारे ओमान में प्रवेश किया। इस पासपोर्ट में तस्वीर सौरभ की ही है, परंतु नाम श्रीलंका के पूर्व स्टार स्पिनर अजंता मेंडिस (Ajanta Mendis) का दर्ज है।

असल में क्रिकेटर के नाम की स्पेलिंग 'Ajantha' होती है। फर्जी पासपोर्ट में अंग्रेजी के 'h' अक्षर को हटाकर 'Ajanta' लिखा गया है, जिससे नाम मिलता-जुलता रहे। इस इंडोनेशियाई पासपोर्ट का नंबर E3387986 है। इसमें जो जन्मतिथि (11 मार्च 1998) डाली गई है, उसके हिसाब से सौरभ की उम्र 28 वर्ष बताई गई है। यह दस्तावेज इसी साल 21 जून 2024 को जारी किया गया, जिसकी वैधता 21 जून 2034 तक दिखाई गई है। एजेंसियां अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि ओमान पहुंचने के लिए उसने इसी फर्जी पहचान का सहारा लिया था या किसी अन्य दस्तावेज का।

क्रिकेटर का नाम ही क्यों?

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फर्जी पहचान के तौर पर श्रीलंकाई क्रिकेटर का नाम रखने के पीछे की वजह अभी जांच के दायरे में है। अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि यह नाम सौरभ की अपनी पसंद था या फर्जी कागजात तैयार करने वाले नेटवर्क की करतूत। पूर्व क्रिकेटर अजंता मेंडिस का इस घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है। क्रिकेट जगत में अजंता मेंडिस 'मिस्ट्री स्पिनर' के रूप में जाने जाते थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'कैरम बॉल' को मशहूर करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। शुरुआती दौर में उनकी गेंदों को समझना दिग्गजों के लिए भी चुनौतीपूर्ण था। सौरभ भी जांच एजेंसियों के साथ कुछ ऐसा ही 'मिस्ट्री' वाला खेल खेल रहा था।

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भारत वापसी में होगी देरी

अधिकारियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट का यह नया मामला सौरभ के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को लंबा खींच सकता है। ओमान के कानूनों के मुताबिक, सबसे पहले वहां की पुलिस फर्जी दस्तावेजों के आरोप में अपनी कानूनी प्रक्रिया और जांच पूरी करेगी। उस कार्रवाई के बाद ही भारत के प्रत्यर्पण निवेदन पर विचार किया जाएगा। फिलहाल भारत सरकार और जांच एजेंसियां दोनों देशों के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के तहत उसे वापस लाने की कवायद में जुटी हुई हैं।

2023 से चल रहा था फरार

महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का कथित सरगना सौरभ 2023 से ही भारतीय एजेंसियों की पहुंच से बाहर था। उसकी तलाश में इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। ईडी का आरोप है कि इस सट्टा एप के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए का अवैध लेनदेन किया गया। मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े मामले में जांच एजेंसी अब तक सौरभ और उसके सहयोगियों की कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है।

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