Digital Arrest Scam: ‘टेरर फंडिंग’ के नाम पर रिटायर्ड प्रोफेसर से 1.04 करोड़ की ठगी, साइबर ठगों का खेल उजागर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के Bilaspur में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़िता को टेरर फंडिंग में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाकर भारी रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली।
जानकारी के मुताबिक, ठगों ने व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए खुद को “संजय पीएसआई” बताकर संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने कथित जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए पीड़िता से बैंक डिटेल्स हासिल कीं। करीब दो घंटे से ज्यादा चली इस कॉल के दौरान उन्हें लगातार धमकाया गया कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें और उनके परिवार को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
डर और दबाव के माहौल में पीड़िता ने पहले 20 लाख से अधिक की रकम ट्रांसफर की, जिसके बाद अलग-अलग किश्तों में कुल 1.04 करोड़ रुपये ठगों के खातों में जमा करा दिए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने अतिरिक्त 50 लाख रुपये की मांग भी रखी। जब पीड़िता ने अपने बेटे से बड़ी रकम की मांग की, तब इस पूरे साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए तरीके से ठगी के मामलों में तेजी आई है, जहां अपराधी कानून का भय दिखाकर लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में सतर्क रहना, अज्ञात कॉल या वीडियो कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देना बेहद जरूरी है।
