मुर्दा लौट आया थाने: जशपुर पुलिस ने जिसका मर्डर केस सुलझाया और आरोपी जेल भेजे वह युवक निकला जिंदा

जशपुर। जशपुर में कानून और जांच का ऐसा मजाक सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। सिटी कोतवाली पुलिस ने दो महीने पहले जिस युवक सीमित खाखा का मर्डर केस सुलझा लेने का दावा किया था और पांच लोगों को जेल भेज दिया था वह युवक शनिवार रात अचानक जिंदा थाने पहुंच गया। 30 साल का सीमित खाखा जब खुद चलकर पुलिस के सामने खड़ा हुआ तो अधिकारियों के होश उड़ गए। पुलिस ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि उसकी अधजली लाश मिली है और उसके दोस्तों ने उसे मारना कबूल किया है लेकिन अब इस खुलासे ने पुलिस की थ्योरी और जांच पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

ऑटो वाले ने पहचाना तब खुला राज

पूरा मामला शनिवार रात का है जब सीमित खाखा झारखंड से बस पकड़कर वापस जशपुर आया। वह सिटोंगा जाने के लिए एक ऑटो में बैठा। ऑटो चलाने वाला उसे पहचानता था और उसे पता था कि सीमित के मर्डर के इल्जाम में गांव के लोग जेल में बंद हैं। ऑटो वाले ने तुरंत इसकी जानकारी सरपंच कल्पना खलखो को दी। सरपंच उसे लेकर सीधे थाने पहुंची और पुलिस को बताया कि जिसे आप मरा मानकर फाइल बंद कर चुके हैं वह आपके सामने खड़ा है।

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पुलिस की थ्योरी: अधजली लाश और झूठा कबूलनामा

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यह मामला 22 अक्टूबर को शुरू हुआ था जब पुरनानगर के पास जंगल में एक अधजली लाश मिली थी। पुलिस ने दावा किया कि सीमित के दोस्तों ने शराब के विवाद में उसे चाकू और रॉड से मारकर लाश जला दी थी। ताज्जुब की बात यह है कि पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने आरोपियों का कबूलनामा कराया और सीमित के घरवालों ने भी उस अनजान लाश को अपना बेटा मान लिया था। अब सवाल यह है कि अगर सीमित जिंदा है तो वह अधजली लाश किसकी थी और पुलिस की सख्ती के आगे निर्दोष दोस्तों ने हत्या की बात क्यों कबूली।

अब असली मर्डर की गुत्थी सुलझाना चुनौती

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि अब असली मृतक की पहचान के लिए एक विशेष जांच टीम बनाई गई है। जो लोग गलती से जेल भेजे गए हैं उन्हें रिहा करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सीमित ने बताया कि उसके पास मोबाइल नहीं था इसलिए वह किसी से संपर्क नहीं कर पाया और वह तो बस क्रिसमस मनाने घर लौट रहा था। पुलिस अब इस उलझन में है कि जिस अधजली लाश का अंतिम संस्कार सीमित के नाम पर कर दिया गया वह बदनसीब शख्स आखिर कौन था।

पुलिस की जांच पर अब उठ रहे सवाल 

मुर्दा तो लौट आया लेकिन पुलिस की कार्यवाही अब संदेहों के घेरे में है क्योंकि जिस व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई वह व्यक्ति मरा ही नहीं लेकिन उस व्यक्ति की हत्या के आरोप में पुलिस ने निर्दोषों को जेल भेज दिया। अब यह बात सबसे बड़ी है और सोचनीय है की क्या पुलिस कार्यवाही दिखाने के लिए किसी को भी जेल भेज सकती है

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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