छत्तीसगढ़: फर्जी दस्तावेजों से सरकारी खजाने पर डाका, 57 हजार का सिस्टम 1.26 लाख में बेचा, तीन आरोपी शिकंजे में

छत्तीसगढ़: फर्जी दस्तावेजों से सरकारी खजाने पर डाका, 57 हजार का सिस्टम 1.26 लाख में बेचा, तीन आरोपी शिकंजे में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें सरकारी स्कूलों के लिए कंप्यूटर खरीदी में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने इस मामले में करीब 4.72 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में 1700 पन्नों का चालान पेश किया है।

इस घोटाले में फर्म संचालक आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा को मुख्य आरोपी बनाया गया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और कूटरचित ऑथराइजेशन लेटर का इस्तेमाल कर शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।

18 जिलों के स्कूलों में सप्लाई, कीमत कई गुना बढ़ाई
जांच एजेंसी के अनुसार, राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत राज्य के 18 जिलों के शासकीय स्कूलों को कंप्यूटर और एलएफडी/टीएफटी मॉनिटर उपलब्ध कराए जाने थे। इस योजना के तहत दो चरणों में सैकड़ों उपकरणों की सप्लाई की गई, लेकिन आरोपियों ने घटिया गुणवत्ता के कंप्यूटर बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर आपूर्ति किए।

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57 हजार के सिस्टम को 1.26 लाख में बेचा
जांच में यह भी सामने आया कि एक कंप्यूटर सेट की वास्तविक बाजार कीमत करीब 57,950 रुपये थी, लेकिन उसे बढ़ाकर 1,26,500 रुपये प्रति सेट के हिसाब से सरकार को बेचा गया। इस तरह प्रत्येक यूनिट पर लगभग 68,550 रुपये का अतिरिक्त भार डाला गया, जिससे करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ।

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फर्जी ऑथराइजेशन लेटर से किया खेल
ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने नामी कंपनियों HP और एग्माटेल के नाम पर फर्जी ऑथराइजेशन लेटर तैयार किए थे, ताकि सप्लाई को वैध दिखाया जा सके. इन दस्तावेजों के आधार पर सरकारी प्रक्रिया को गुमराह कर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता की गई।

अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में उस समय के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जांच के बाद आशुतोष चावरे (तत्कालीन संयुक्त संचालक), बजरंग प्रजापति और पी. रमेश (सहायक संचालक) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

15 साल पुराना मामला, अब खुली परतें
यह पूरा मामला वर्ष 2010-11 और 2011-12 के दौरान हुई कंप्यूटर खरीदी से जुड़ा है, जिसमें अब जाकर विस्तृत जांच के बाद बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। ईओडब्ल्यू ने अदालत में पेश चालान में आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के पर्याप्त साक्ष्य होने की बात कही है।

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