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सीजीएमएससी घोटाला शशांक चोपड़ा ने उगले राज अब ईडी के रडार पर छह और बड़े कारोबारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी सीजीएमएससी के 660 करोड़ रुपये के बहुचर्चित दवा और मेडिकल उपकरण खरीदी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपना शिकंजा और कस दिया है। दुर्ग की कंपनी मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा से रिमांड के दौरान हुई कड़ी पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शशांक की निशानदेही पर अब ईडी ने छह अन्य कारोबारियों और उनके करीबियों को अपनी जांच के दायरे में ले लिया है। आज शशांक की पांच दिन की रिमांड खत्म हो रही है जिसके बाद ईडी दोपहर तीन बजे उसे विशेष कोर्ट में पेश करेगी।
अधिकारियों के संरक्षण में महज 27 दिनों में डकार लिए साढ़े सात सौ करोड़
इस घोटाले की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है जिसमें रसूखदार अधिकारियों और सप्लायर्स की जुगलबंदी ने सरकारी खजाने को जमकर लूटा। जांच में सामने आया है कि आईएएस और आईएफएस अफसरों की मिलीभगत से महज 27 दिनों के भीतर लगभग 750 करोड़ रुपये की दवाइयों की अंधाधुंध खरीदी कर ली गई। इस बंदरबांट से सरकार पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। शशांक चोपड़ा ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि रायपुर जेल में बंद डॉ. अनिल परसाई, दीपक कुमार बांधे, बसंत कुमार कौशिक, कमलकांत पाटनवार और क्षिरोद रौतिया जैसे अधिकारियों ने उसे पूरा संरक्षण दिया था।
अब सहयोगियों की बारी
ईडी सूत्रों ने जानकारी दी है कि रिमांड के दौरान शशांक के सामने घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और फर्जी बिलों का पूरा पुलिंदा रखा गया। जांच एजेंसी अब उन फाइनेंशियल चैनलों को खंगाल रही है जिनके जरिए रिश्वत का पैसा और कमीशन इधर से उधर किया गया। शशांक से मिली जानकारी के बाद अब उन सहयोगियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं जिन्होंने टेंडर प्रक्रिया और फर्जी सप्लाई में उसकी मदद की थी। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि घोटाले की आंच अब सीजीएमएससी के तीन पूर्व आईएएस अधिकारियों तक भी पहुंच रही है।
रिमांड में इन अहम बिंदुओं पर हुई पूछताछ
- टेंडर प्रक्रिया में अफसरों के साथ मिलकर की गई सेटिंग और कमीशन का खेल
- बिना सामान सप्लाई किए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों का भुगतान लेना
- काली कमाई को सफेद करने के लिए बनाए गए फाइनेंशियल नेटवर्क की पहचान
- रसूखदार अधिकारियों को दी गई रिश्वत और उनके साथ किए गए गुप्त सौदे
डिस्क्लेमर: यह समाचार प्रवर्तन निदेशालय की जांच और कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सामने आए तथ्यों पर आधारित है। मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ अभी जांच जारी है और दोष केवल सक्षम न्यायालय द्वारा ही सिद्ध किया जा सकता है। संबंधित पक्षों को अपनी सफाई देने का पूरा कानूनी अधिकार है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
