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शिक्षा के नाम पर करोड़ों का 'ब्रिलिएंट' खेल: सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर PNB ने कैसे बांट दिया 21 करोड़ का लोन?
नजूल की जमीन का है पूरा विवाद, प्रशासन भेज चुका है लीज निरस्त करने का नोटिस।
बिलासपुर। शहर के मिशन अस्पताल रोड स्थित ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल के पीछे एक बड़ा और 'ब्रिलिएंट' खेल चल रहा है। जिस जमीन का उपयोग सिर्फ सार्वजनिक (पब्लिक यूज) कामों के लिए होना था, उस पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने आंख मूंदकर 21.13 करोड़ रुपए का लोन दे दिया। बैंक के अफसरों की इस 'मेहरबानी' और स्कूल प्रबंधन की चालाकी ने सिस्टम पर करारा तमाचा जड़ा है। कर्ज न चुकाने पर अब यह संपत्ति ई-नीलामी के कगार पर आ गई है।
बिना नियम देखे लुटा दिए करोड़ों
यह पूरा घपला खसरे में बंटे एक 45,000 स्क्वायर फीट के टुकड़े का है। इस जमीन पर PNB से 21 करोड़ 13 लाख रुपए का कर्ज लिया गया। जब लोन नहीं पटा, तो स्ट्रेस्ड एसेट मैनेजमेंट (Stressed Asset Management) के तहत इस संपत्ति को कुर्क करने की नौबत आ गई। इसी 6 मार्च 2026 को इसकी ई-नीलामी भी प्रस्तावित कर दी गई। यहां सबसे बड़ा सवाल बैंक प्रबंधन पर है। जब जमीन का इस्तेमाल सिर्फ सार्वजनिक उद्देश्य के लिए होना था, तो इतनी बड़ी रकम का लोन आखिर किस नियम के तहत पास कर दिया गया? क्या सरकारी बैंकों में आम आदमी और रसूखदारों के लिए नियम अलग-अलग हैं?
मान्यता के नाम पर पालकों की आंखों में धूल
घपला सिर्फ जमीन और बैंक के लोन तक सीमित नहीं है। स्कूल प्रबंधन बच्चों के पालकों को भी शानदार तरीके से बेवकूफ बना रहा है। यह स्कूल सीबीएसई (CBSE) और छतीसगढ़ (CG) बोर्ड के बीच झूल रहा है। स्कूल ने बड़ी चालाकी से सीबीएसई की वेबसाइट पर अपना स्थानीय पता किसी कॉर्पोरेट दफ्तर की तरह डाल रखा है। इसे पढ़कर भोले-भाले पालक मान लेते हैं कि मिशन कंपाउंड और बहतराई, दोनों स्कूलों के पास सीबीएसई की पक्की मान्यता है। जबकि असल में यह सिर्फ आधा सच है और फीस बटोरने का एक बड़ा जरिया है।
क्या है लीज और जमीन का पूरा विवाद?
इस जमीन का इतिहास भी किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं है। नजूल रिकॉर्ड के मुताबिक, यह 14 एकड़ का पूरा प्लॉट मूल रूप से सीडब्ल्यूबीएम (CWBM) के नाम पर दर्ज था। इसी में से करीब 2 एकड़ का हिस्सा राय साहब बनवारी लाल अग्रवाल को बेच दिया गया था।
हाल ही में जब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जैकमैन मेमोरियल अस्पताल की लीज रिन्यू करने से मना कर दिया और लीज निरस्त कर दी, तो बवाल मच गया। मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा। वहां जैकमैन के वकील ने इस बेची गई 2 एकड़ जमीन का मुद्दा उठा दिया।
लीज निरस्त करने का नोटिस जारी
हाईकोर्ट में महाधिवक्ता ने साफ कर दिया कि नजूल न्यायालय से उन सभी लीज धारियों को नोटिस भेजा जा चुका है, जिनके पास यह 2 एकड़ जमीन (जो अब कई छोटे टुकड़ों में बंट चुकी है) है। प्रशासन ने नोटिस में सीधा पूछा है कि आखिर उनकी लीज क्यों न निरस्त कर दी जाए?
एक तरफ मान्यता का गोलमाल, दूसरी तरफ सार्वजनिक जमीन पर करोड़ों का कर्ज। शिक्षा के नाम पर चल रहे इस 'व्यापार' ने बता दिया है कि अगर रसूख हो, तो नियम-कानून को कैसे ताक पर रखा जा सकता है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
