300 करोड़ की काली कमाई का खुलासा: रिटायर IFS संजय शुक्ला की शिकायत PMO पहुंची; CBI जांच की मांग, जानें कहां-कहां है प्रॉपर्टी

300 करोड़ की काली कमाई का खुलासा: रिटायर IFS संजय शुक्ला की शिकायत PMO पहुंची; CBI जांच की मांग, जानें कहां-कहां है प्रॉपर्टी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक रसूखदार रिटायर आईएफएस (IFS) अफसर की 300 करोड़ रुपये की काली कमाई का मामला सामने आया है। इस अफसर का नाम संजय शुक्ला है। वे फिलहाल राज्य की अहम संस्था रेरा (RERA) के अध्यक्ष हैं। उनकी अथाह संपत्ति की शिकायत अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहुंच गई है। शिकायतकर्ता ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीबीआई (CBI) को गोपनीय चिट्ठी भेजी है। पीएमओ ने इस शिकायत को दर्ज कर लिया है और इसे आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है।

किसने की शिकायत और क्या हैं आरोप?

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने यह शिकायत की है। उनका सीधा आरोप है कि संजय शुक्ला ने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार का बड़ा साम्राज्य खड़ा किया है। संजय शुक्ला का नाम पहले से ही रावतपुरा मेडिकल यूनिवर्सिटी की मान्यता से जुड़े घोटाले में सीबीआई के आरोपियों की लिस्ट में है। हैरानी की बात यह है कि दागदार होने के बावजूद सरकार ने उन्हें रेरा अध्यक्ष जैसी कुर्सी पर बिठाए रखा है। अब नरेश गुप्ता ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।

कहां-कहां फैला है जमीनों का जाल?

चिट्ठी में संजय शुक्ला की 10 से ज्यादा बेशकीमती संपत्तियों की लिस्ट दी गई है। इनमें ये संपत्तियां शामिल हैं:

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  •   VIP रोड (एयरपोर्ट रोड): 11 एकड़ में बना लग्जरी वेडिंग लॉन और होटलनुमा परिसर।
  •   एयरपोर्ट रोड: 4 एकड़ की कीमती जमीन।
  •  सिरपुर रोड (बरनवापारा मार्ग): करीब 120 एकड़ का विशाल फार्म हाउस।
  •  नया रायपुर (धर्मपुरा रोड): 15 एकड़ जमीन।
  •  रिंग रोड नंबर 2 (कबीर नगर): 9 एकड़ की प्लॉटिंग।
  •  माना थाना क्षेत्र: 7 एकड़ जमीन।
  •  शदानी दरबार के सामने: 14 एकड़ की प्राइम लोकेशन वाली जमीन।
  •  सिविल लाइंस: 5000 वर्गफुट का बड़ा प्लॉट।
  •   मौलश्री विहार (VIP कॉलोनी): आलीशान डुप्लेक्स मकान।
  •  बोरियाकला और नया रायपुर: हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियों में डुप्लेक्स मकान।
IFS होकर IAS वाले मजे

शिकायत में तत्कालीन मुख्य सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संजय शुक्ला भारतीय वन सेवा (IFS) के अफसर थे, लेकिन उन्हें जानबूझकर ऐसे पद दिए गए जो आमतौर पर आईएएस (IAS) अफसरों के लिए तय होते हैं। इन पदों पर बैठकर एक पूरा सिंडिकेट चलाया गया। साधारण परिवार से आने वाले इन अफसरों ने पद के नशे में जमकर भ्रष्टाचार किया और 300 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बना ली। तत्कालीन मुख्य सचिव पर भी हजारों करोड़ की संपत्ति बनाने का दावा किया गया है।

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पहले खुद जमीन खरीदी, फिर वहीं लाए सरकारी प्रोजेक्ट

इन अफसरों का भ्रष्टाचार करने का तरीका बेहद शातिर था। ये पहले किसी इलाके में औने-पौने दाम पर जमीन खरीदते थे। फिर अपने रसूख का इस्तेमाल कर ठीक उसी इलाके में सरकारी हाउसिंग प्रोजेक्ट घोषित करवा देते थे। इससे इनकी जमीनों के रेट रातों-रात आसमान छूने लगते थे। यानी सरकारी योजनाओं को सिर्फ अपनी जेब भरने के लिए इस्तेमाल किया गया।

भिलाई के तालपुरी प्रोजेक्ट में 70 करोड़ का खेल

हाउसिंग बोर्ड में तैनाती के दौरान भी खूब धांधली हुई। भिलाई के मशहूर तालपुरी प्रोजेक्ट में ठेकेदार को नियमों को ताक पर रखकर लगभग 70 करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा पेमेंट किया गया। आरोप है कि इसके बदले में करीब 20 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई। ठेके की शर्तों में बदलाव करके हाउसिंग बोर्ड को करोड़ों का चूना लगाया गया।

केंद्रीय एजेंसियों की जासूसी तक कराई

शिकायत में यह भी खुलासा हुआ है कि इन अफसरों के हौसले इतने बुलंद थे कि इन्होंने ईडी (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई रोकने की कोशिश की। एजेंसियों के दफ्तरों की जासूसी कराई गई। जब छापे पड़ते थे, तो उन पर नजर रखने के लिए ड्रोन उड़वाए गए। ईडी ने यह जानकारी ऊपर भी भेजी थी, लेकिन रसूख के चलते राज्य में मामले दबा दिए गए।

अब आगे क्या: ACB-EOW फेल, सिर्फ CBI पर भरोसा

शिकायतकर्ता एडवोकेट नरेश गुप्ता ने साफ कहा है कि राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) इस मामले में पूरी तरह नाकाम रही हैं। उनके पास कई शिकायतें आईं लेकिन दबा दी गईं। अफसरों का प्रभाव इतना ज्यादा है कि बिना स्वतंत्र एजेंसी के सच सामने नहीं आ सकता। इसलिए पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।

जनता के टैक्स का पैसा लूटकर अपना घर भरना एक गंभीर अपराध है। अब गेंद बीजेपी सरकार के पाले में है। अगर वाकई राज्य में सुशासन कायम करना है, तो ऐसे रसूखदार और दागी अफसरों पर तुरंत और सख्त एक्शन लेना ही होगा।

इसकी जांच की फाइल दो महिने से सरकार के पास आ गई है आखिर क्यों फाइल को सरकार कार्यवाही करने के बजाय दबा कर बैठी हुई है क्या इस फ़ाइल को मुख्य सचिव के पास प्रस्तुत किया गया है और नहीं तो क्यों क्या इसको सरकार संज्ञान में लेकर तत्काल कार्यवाही करेगी?

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