रायपुर के एनएच एमएमआई अस्पताल में बड़ी लूट आयुष्मान कार्ड होने पर भी मरीजों की जेब काट रहा प्रबंधन

रायपुर के एनएच एमएमआई अस्पताल में बड़ी लूट आयुष्मान कार्ड होने पर भी मरीजों की जेब काट रहा प्रबंधन

रायपुर। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को रायपुर के निजी अस्पताल पलीता लगा रहे हैं। शहर के मशहूर एनएच एमएमआई अस्पताल में मरीजों के साथ सरेआम लूट मची है। मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद प्रबंधन इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूल रहा है। मजबूरी में तीमारदारों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। लोग अपनों की जान बचाने के लिए कर्ज ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। लोग हेल्पलाइन नंबर 104 पर फोन कर रहे हैं। अधिकारी भी चिट्ठियां लिख रहे हैं लेकिन अस्पताल प्रबंधन पर कोई असर नहीं हो रहा है। भास्कर को कई मरीजों ने अपनी दर्दभरी कहानी बताई है जिससे साफ होता है कि यहां इलाज के नाम पर कैसा गोरखधंधा चल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अब तक सिर्फ कागजों तक सीमित है। मिली जानकारी के मुताबिक अस्पताल के खिलाफ पांच बड़ी शिकायतों पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन मामलों की जांच अभी चल रही है। पिछले तीन सालों में इस अस्पताल के खिलाफ दस से ज्यादा शिकायतें आ चुकी हैं। इसके बावजूद विभागीय अफसर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं। अधिकारी सिर्फ नोटिस थमाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। रसूखदार अस्पताल पर हाथ डालने से अधिकारी बच रहे हैं और इसका सीधा नुकसान गरीब और लाचार मरीजों को हो रहा है।

अस्पताल की मनमानी समझने के लिए राजनांदगांव के रमेश परहाते का मामला काफी है। रमेश को फरवरी 2024 में हार्ट अटैक आया था। घबराए परिजनों ने उन्हें रायपुर के इसी अस्पताल में भर्ती कराया। रमेश यहां 14 दिन तक भर्ती रहे। अस्पताल ने सर्जरी जांच और रूम किराए के नाम पर सीधे आठ लाख रुपये का लंबा चौड़ा बिल थमा दिया। रमेश के परिवार ने जब आयुष्मान योजना से इलाज करने को कहा तो प्रबंधन ने साफ मना कर दिया। जान बचाने की मजबूरी में उन्हें पूरे आठ लाख रुपये चुकाने पड़े। बाद में उन्होंने सीएमएचओ दफ्तर में इसकी लिखित शिकायत की। 13 अप्रैल 2024 को विभाग ने अस्पताल को नोटिस तो भेजा लेकिन उसके बाद फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई और अस्पताल प्रशासन मजे से अपना काम कर रहा है।

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लूट का एक और हैरान करने वाला मामला पुरानी बस्ती निवासी धीरज शर्मा का है। धीरज के फूफा को नियमित डायलिसिस की जरूरत होती है। शुरू में अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड पर डायलिसिस किया। कुछ दिन बाद ही अस्पताल प्रबंधन ने हर सेशन के लिए तीन हजार रुपये नगद मांगना शुरू कर दिया। परिजनों ने मरीज की जान बचाने के लिए नगद पैसे दिए। बाद में पता चला कि अस्पताल प्रबंधन नगद पैसे भी ले रहा था और आयुष्मान कार्ड से भी पैसे काट रहा था। यह सीधे तौर पर धोखाधड़ी का मामला है। इस धोखाधड़ी की शिकायत के बाद भी विभाग ने कुछ नहीं किया तो परेशान होकर मरीज को दूसरा अस्पताल खोजना पड़ा।

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जुलाई 2025 में माध्यमिक शिक्षा मंडल में काम करने वाले खुमान साहू को ब्रेन स्ट्रोक आया। परिजन उन्हें लेकर भागे और अस्पताल पहुंचे। वहां जाते ही प्रबंधन ने दस हजार रुपये जमा करवा लिए। जब परिवार ने आयुष्मान कार्ड दिखाया तो अस्पताल ने इलाज करने से ही मना कर दिया। चार घंटे तक उन्हें वहीं रखा गया और शाम चार बजे छुट्टी दे दी गई। इस चार घंटे के लिए 24 हजार रुपये का बिल बना दिया गया जबकि इसमें दवाइयों का खर्च सिर्फ दो हजार रुपये था। आयुष्मान दफ्तर से फोन जाने पर अस्पताल ने पहले हामी भरी थी लेकिन बाद में बेड खाली नहीं होने का बहाना बनाकर मरीज को चलता कर दिया।

इन तमाम मामलों पर सीएमएचओ डॉ मिथिलेश चौधरी का रटा रटाया जवाब सामने आया है। उनका कहना है कि आयुष्मान योजना में गड़बड़ी की शिकायतों पर अस्पताल को नोटिस दिया गया है। लापरवाही के एक पुराने मामले में अस्पताल पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उनका कहना है कि कोई और गंभीर शिकायत आएगी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि मरीजों से लाखों रुपये की लूट और दोहरी ठगी के बाद भी विभाग को और कितनी गंभीर शिकायत का इंतजार है। सिस्टम की यह सुस्ती मरीजों पर भारी पड़ रही है।

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