NEET 2026 पेपर लीक में गहराया महाराष्ट्र कनेक्शन, CBI के रडार पर हाईप्रोफाइल पैरेंट्स और करोड़ों का नेटवर्क
पुणे। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने अब एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में महाराष्ट्र से जुड़े ऐसे हाईप्रोफाइल अभिभावकों और कारोबारी परिवारों के नाम सामने आए हैं, जिन पर मोटी रकम देकर प्रश्नपत्र हासिल करने का शक है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के संगठित एजुकेशन रैकेट का हिस्सा हो सकता है। इस खुलासे के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
CBI सूत्रों के मुताबिक, कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक खर्च किए। जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर कुछ लोगों ने खरीदा गया पेपर अन्य छात्रों तक पहुंचाकर उससे मुनाफा कमाने की कोशिश की। एजेंसी अब इस “पेपर ब्लैक मार्केट” के पूरे नेटवर्क की आर्थिक और डिजिटल जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ है और लंबे समय से सक्रिय था।
जांच के दौरान महाराष्ट्र के नांदेड़, लातूर और पुणे में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। CBI ने कई संदिग्धों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक डिटेल, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सऐप चैट जब्त किए हैं। कुछ अभिभावकों और बिचौलियों से घंटों पूछताछ भी की गई। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर प्रश्नपत्र किन माध्यमों से छात्रों तक पहुंचा और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
मामले में पुणे के एक निजी कोचिंग संस्थान की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले विशेष तरीके से तैयार कराया गया था। इतना ही नहीं, रिजल्ट आने से पहले ही कुछ छात्रों को “टॉपर” बताकर प्रचार सामग्री जारी किए जाने से शक और गहरा गया है। हालांकि संबंधित संस्थान ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
CBI ने इस मामले में पुणे के एक केमिस्ट्री प्रोफेसर को कथित “मास्टरमाइंड” मानते हुए गिरफ्तार किया है। वहीं, लातूर स्थित एक कोचिंग सेंटर संचालक को भी हिरासत में लिया गया है। एजेंसी का दावा है कि पुणे-लातूर-नांदेड़ बेल्ट में सक्रिय एक संगठित नेटवर्क छात्रों और अभिभावकों से मोटी रकम लेकर पेपर उपलब्ध कराता था। अब डॉक्टरों, शिक्षकों, एजेंटों और एजुकेशन कंसल्टेंट्स से भी पूछताछ की जा रही है।
इस पूरे विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों का कहना है कि उनकी मेहनत और ईमानदारी के साथ खिलवाड़ हुआ है। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। हालांकि NTA ने दावा किया है कि परीक्षा प्रणाली सुरक्षित थी, लेकिन CBI की लगातार बढ़ती कार्रवाई से साफ है कि जांच अभी और बड़े खुलासे कर सकती है।
